हरियाणा सरकार ने राज्य में शोध और नई तकनीक को आम लोगों की समस्याओं से जोड़ने की दिशा में नई पहल की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा स्टेट इनोवेशन सोसाइटी की पहली बैठक में ‘नवाचार योजना’ को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
इस योजना का मकसद विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के नए विचारों को जमीन पर उतारना है। अगर किसी विद्यार्थी या शोधकर्ता के पास प्रदेश की किसी वास्तविक समस्या का तकनीकी या नया समाधान है, तो उसे प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए सरकार की ओर से सीड फंडिंग दी जा सकेगी। शुरुआती चरण में चयनित प्रस्तावों को DPR तैयार करने के लिए 1 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका फायदा समाज और प्रदेश को मिले। योजना के तहत ‘लैब से फील्ड और फील्ड से नीति’ के आधार पर शोध को आगे बढ़ाया जाएगा।
योजना में डिजिटल गवर्नेंस, टिकाऊ कृषि, हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, शहरी प्रबंधन, सामाजिक-आर्थिक विकास और हरियाणा@2047 जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में एक जिले में भूमिगत जल की गुणवत्ता पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही गूगल इंडिया, IIT दिल्ली और NIT कुरुक्षेत्र जैसे संस्थानों के सहयोग से AI, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।


