गुरुवार को भगवान विष्णु के पूजा का विधान है, भगवान विष्णु सुख समृद्धि के देवता कहे जाते है भगवान को पीला रंग और पीले फूल विशेष पसंद है, वही भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन चढ़ाते है लेकिन कहा जाता है भगवान को जो भी सच्चे मन और भाव से चढ़ाओं तो भगवान उसको तुरंत स्वीकार करते है। सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान को जो भी अर्पण किया जाए, भगवान उसे प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण करते हैं. चाहे वो शबरी द्वारा भगवान राम को खिलाए गए झूठे बेर हों या फिर विदुरानी द्वारा निवेदित किये गए केले के छिलके हों, पर भगवान विष्णु को गुड़ और चने की दाल अत्यधिक प्रिय है. पौराणिक ग्रंथों में भी इस बात का जिक्र किया गया है. गुड़ और चना हमेशा सभी के घर में उपलब्ध रहता है और ज्यादा महंगा नही मिलता है।

भगवान विष्णु की पूजा के साथ गुरुवार के दिन केले के पौधे की भी पूजा करते हैं, पीली वस्तुओं का दान करते हैं और भगवान को चने या चने की दाल और गुड़ का भोग लगाते हैं । भगवान विष्णु को चने और गुड़ का भोग क्यों लगता है इसकी एक कथा है आज वो कथा बताते है-

चने और गुड़ का भोग लगाने से जुड़ी एक पौराणिक कथा है

भगवान विष्णु के परमभक्त देवर्षि नारद उनसे आत्मा का ज्ञान लेना चाहते थे लेकिन वे जब भी श्रीहरि से इसके बारे में अपनी इच्छा प्रकट करते तो भगवान यह कह कर टाल देते थे कि पहले उस ज्ञान के योग्य बनना होगा। नारद जी ने स्वयं को उस ज्ञान के योग्य बनाने के लिए कठोर जप- तप किया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। इसके पश्चात वे पृथ्वी लोक के भ्रमण पर चले गए। इस दौरान उन्होंने एक जगह देखा कि भगवान श्रीहरि एक मंदिर में बैठे हैं और वृद्ध् महिला उनको कुछ खिला रही है। भगवान नारद को बड़ी उत्सुकता हुई उन्होंने देखा भगवान बड़े चाव से उस वृद्ध् को देखा इसके बाद भगवान विष्णु के वहां से प्रस्थान करने के बाद नारद मुनि वहां पहुंचे और वृद्ध महिला से जानना चाहा कि वह भगवान को क्या खिला रही थीं?

उस वृद्ध महिला से पूछने के बाद उसने बताया कि उसने भगवान विष्णु को गुड़ और चने प्रसाद स्वरुप खिलाए है। ऐसा सुनने के बाद नारद जी वही पर भगवान विष्णु का पूजाल करने लगे और लोगों में प्रसाद स्वरुप गुड़-चना बांटने लगे । कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और नारद मुनि से कहा कि सच्चे मन से जो भक्ति करता है, वही ज्ञान का अधिकारी होता है। भगवान विष्णु ने कहा कि जो भक्त उनको गुड़ और चने का भोग लगाएगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। ऐसी मान्यता है कि तभी से भगवान विष्णु को गुड़ और चना का भोग लगाते हैं। इसके बाद यह कथा प्रचलित हो गई और सभी भक्त भगवान विष्णु को गुड़ चने का भोग लगान लगे ।

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