नवरात्र में सभी नौ दिनों तक देवी की विशेष पूजा की जाती है , हर दिन देवी के एक एक स्वरुप की पूजा की जाती है,
मां कात्यायनी को नवदुर्गा के छठे स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं. इनकी उपासना से भक्तों को साहस, धर्म और विजय की प्राप्ति होती है।
देवी पुराणों और विशेष रूप से देवी भागवत पुराण में मां कात्यायनी को आदिशक्ति का अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है
धार्मिक मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा.
कल 24 मार्च को चैत्र नवराात्रि के छठवें दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है जानते है इनकी पूजा विधि-
मां कात्यायनी की इस विधि से करें पूजा
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और नारंगी रंग के कपड़े पहनें.
मां को नारंगी फूल जैसे गेंदा अर्पित करें. कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं
माता के समक्ष एक पान चढ़ाएं और अपनी मनोकामना कहते हुए देवी से प्रार्थना करें.
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” का मंत्र जाप करें।
माता के सामने दीपक जलाएं खुशबू वाली अगरबत्ती जलाएं।
माता की कथा पढ़ें और आरती करें. सुबह-शाम इसी विधि से देवी की आराधना करें.
इस दिन दान में लोगों को संतरा, शहद, कपड़े, जूते-चप्पल आदि दान करें.
माता को शहद का भोग लगाएं, हलवा या मीठा भोग लगाएं
देवी कात्यायनी को दुर्गा का महा स्वरूप कहा जाता है। वे असुरों का संहार कर धर्म और न्याय की स्थापना करती हैं।
माता के आशीर्वाद से सभी संकट दूर होते हैं। भक्तों के जीवन में शांति और खुशहाली आती है।


