सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है भगवान शंकर की पूजा शिवलिंग के जरिये की जाती है। शिवलिंग में भगवान् शिव के साथ-साथ उनका पूरा परिवार विराजमान है। शिवलिंग का जलाभिषेक करने का महत्व काफी अधिक है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शंकर प्रसन्न होते है। शिव जी को खासतौर पर ठंडक देने वाली चीजें जैसे जल, दूध, दही, घी चढ़ाने की परंपरा है।
शिव जी का एक नाम रुद्र भी है, इसलिए जलाभिषेक को रुद्राभिषेक भी कहते हैं।
जानिए शिवलिंग पर जल और दूध क्यों चढ़ाते हैं?
पुराने समय में देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। समुद्र मंथन में अमृत कलश जैसे 14 रत्न निकले थे, लेकिन सभी रत्नों से पहले हलाहल नाम का विष निकला था।
हलाहल विष की वजह से संसार के सभी जीव के प्राण खतरे में पड़ गए थे। विष को कहां रखा जाए इसलिए सभी प्राणियों को बचाने के लिए शिव जी ने ये विष पी लिया था। शिव जी विष को गले से नीचे नहीं जाने दिया था, गले में विष होने से शिव जी का गला नीला गया हो गया। नीले गले की वजह से भगवान का एक नाम नीलकंठ हो गया।
विष की वजह से शिव जी के शरीर में जलन होने लगी थी, इस जलन को शांत करने के लिए शिव जी को शीतल जल अर्पित किया गया। जिससे शिव जी को ठंडक मिल सके, इसके बाद से ही शिवलिंग पर ठंडी तासीर वाली चीजें जैसे जल, दूध, दही, घी चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
जल और दूध चढ़ाते समय ध्यान रखने वाली बातें
शिवलिंग पर जल सोने, चांदी, पीतल या तांबे के लोटे से चढ़ाना चाहिए।
दूध हमेशा स्टील के लोटे से चढ़ाना चाहिए। ताबें के लोटे से दूध चढ़ाना शुभ नही माना जाता है। इसलिए ताबें के लोटे से दूध ना चढ़ाए।
लोटे में जल-दूध भरें और पतली धारा शिवलिंग पर चढ़ाएं।
जल-दूध चढ़ाते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते रहना चाहिए।
जल चढ़ाते समय शिव जी के मंत्रों का जप करें। जल के साथ ही शिवलिंग पर दूध, दही, शहद भी चढ़ाना चाहिए।
अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल आदि चीजें अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं।
धूप-दीप जलाकर आरती करें। भगवान के मंत्रों का जाप करें। शिव मंत्र ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप किया जा सकता है।


