हरियाणा की शाहाबाद, करनाल और पानीपत सहकारी चीनी मिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार हासिल किए हैं। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने इसे प्रदेश के लिए उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक बायो-एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

नई दिल्ली में आयोजित नेशनल शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्क्लेव में इन मिलों को पुरस्कार दिए गए। शाहाबाद मिल को पेराई सत्र 2024-25 में तकनीकी दक्षता के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। करनाल मिल ने तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास, जबकि पानीपत मिल ने तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में पहला स्थान हासिल किया।

डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रदेश में करीब 690 KLPD क्षमता वाली एथेनॉल परियोजनाओं पर लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निवेश की दिशा में काम चल रहा है। पानीपत में 90 KLPD की एथेनॉल परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य चीनी के साथ एथेनॉल, बिजली, बायो-सीबीजी और दूसरे मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना है।

हरियाणा की सहकारी चीनी मिलों ने अब तक करीब 285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 26.24 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। को-जनरेशन से करीब 12.20 करोड़ यूनिट बिजली ग्रिड को दी गई, जिससे लगभग 76.60 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।

मंत्री ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था में गन्ना किसान सबसे अहम है। गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, टिश्यू कल्चर और मशीनी कटाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। चार फुट की दूरी पर गन्ना बोने वाले किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।

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