हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है। भगवान विष्णु समृद्दि के देवता माने जाते है। उनकी पूजा में पीले रंग औऱ केले के पेड़ की पूजा करना बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। सनातन धर्म में गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि, ज्ञान और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है.
गुरुवार की पूजा में पीले रंग का खास महत्व होता है। मान्यता है कि पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है. इस दिन पीली रंग के कपड़े पहनना, खाना और दान करना शुभ माना जाता है. पीला रंग जीवन में स्नेह, उत्साह और धैर्य बढ़ाने वाला रंग भी कहा जाता है. पीला वस्त्र पहनने से आर्थिक उन्नति में सहायता मिलती है। जब बृहस्पति देव की कृपा हो, तो दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाता है।” कहते है पीला रंग शुभता का प्रतीक माना जाता है।
गुरुवार की पूजा में पीले रंग का खास महत्व
पीला रंग जीवन में स्नेह, उत्साह और धैर्य बढ़ाने वाला रंग भी माना जाता है.
बृहस्पतिवार के दिन पीले कपड़े पहनना, पूजा में पीले फूल, चंदन, केसर और हल्दी का उपयोग करना शुभ माना जाता है.
मान्यता है कि गुरुवार को पीली वस्तुएं जैसे पीले वस्त्र, चना दाल, हल्दी, पीले फल और फूल भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
पीला रंग ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र धारण करने से घर में खुशहाली आती है और मन प्रसन्न रहता है.
मान्यता है कि गुरुवार को पीली चीजें अर्पित करने और व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं.
इसके अलावा, इस दिन पीले रंग की वस्तुओं का दान करने से घर में आर्थिक संकट दूर होता है और धन धान्य सौभाग्य की वृद्धि होती है.
इस दिन घर को पीले फूलों से सजाना, पीली वस्तुएं दान करना और पूजा में पीले दीपक का प्रयोग करना जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
इस दिन भगवान को चने की दाल और गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है।


