पंचकूला, 16 जून: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंचकूला द्वारा प्राकृतिक खेती जागरूकता अभियान के तहत आज गांव बिदना भोज नाइटा खंड मोरनी में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि रासायनिक खेती को त्यागकर प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए।

उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्परिणाम आज समाज के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। कीटनाशकों एवं रासायनिक तत्वों के अवशेष हमारे खाद्य पदार्थों के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंच रहे हैं तथा नवजात बच्चों तक भी इनका प्रभाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी भूमि, जल, पर्यावरण तथा आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाएं और एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण करें।

उन्होंने बताया कि सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों तथा देसी गाय पालने वाले किसानों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। कम से कम एक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रति देसी गाय की खरीद पर दी जाने वाली सब्सिडी 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये की गई है।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए खंड कृषि अधिकारी डॉ. मुकेश भांखड़ ने किसानों को फसलों में लगने वाली सुंडी के प्रभावी प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कीटनाशकों के लगातार उपयोग से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को बार-बार स्प्रे करना पड़ता है, जिससे खेती की लागत बढ़ती है।

इस अवसर पर किसानों ने पहाड़ी क्षेत्र में प्रतिवर्ष होने वाले भूमि कटाव की समस्या भी उठाई। इस पर मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने संबंधित अधिकारियों को इस समस्या का स्थाई समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में कृषि विभाग से डॉ. सुरेंद्र यादव , डॉ. राकेश पोरिया , डॉ. जे.पी. शर्मा , डॉ. संजय सेलवाल, डॉ. पुनिया, डॉ हेमराज तथा बागवानी विभाग से डॉ. प्रत्युष सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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