भगवान भोले को खुश करना सबसे सरल है उनको कहा भी जाता है भगवान भोलेनाथ, उनको न कोई विशेष भोग चाहिए और न ही कोई विशेष जप तप की आवश्यकता है ,वो तो सिर्फ एक लोटे जल में खुश हो जाते है। भगवान शिव के व्रत में एक बहुत ही प्रचलित औऱ प्रभावशाली व्रत है सोम प्रदोष व्रत।

सोम प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित होता है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।  सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। आपको बता दें, प्रदोष का अर्थ होता है संध्या काल। यह वह समय होता है जब दिन और रात का मिलन होता है।

ऐसी मान्यता है कि मान्यता है कि इस समय भगवान शिव की विशेष पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मन पवित्र होता है। अब ऐसे में सोम प्रदोष के दिन भातपूजन किस विधि से करने से लाभ हो सकता है  कई सारे लोग इस दिन व्रत करते हैं।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा कैसे करें

इसके लिए आपको जल्दी उठकर स्नान करना है।

फिर आपको साफ कपड़ों को पहनना है।

इसके बाद अपने हाथों में जल, अक्षत और फूल को लेकर इस व्रत का संकल्प लेना चाहिए ।

इसके बाद आपको पास के मंदिर में जाकर हर रोज की तरह भगवान शिव का श्रृंगार करना है।

फिर उन्हें फल, फूल, दूध, घी आदि चढ़ाना है।

इसके बाद आपको बेलपत्र भगवान शिव को चढ़ाना है।

फिर आपको आसन पर बैठकर शिव मंत्रों का जाप करना है।

आपको व्रत कथा पढ़नी है।

इसके बाद आपको 11 बार ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र: का जाप करना है।

फिर आपको घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करनी है।

आरती के बाद तीन बार ताली बजाएं और भगवान से इस व्रत को संपन्न होने की प्रार्थना करें।

इसके बाद आपको भगवान शिव को बिना पीठ दिखाए वहां से जाएं।

शाम को आप शिव मंदिर में जाकर दीया जलाएं।

इसके बाद अपने व्रत को पूरा करें।

इस तरह आप सोम प्रदोष व्रत करिए और भगवान भोलेनाथ की कृपा पाइएं ।

कहते है व्रत को करने से पहले आप 11या 21 दिन के सोमवार व्रत का संकल्प ले कर व्रत की शुरुआत करें।

 

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