महिलाओं की डिजिटल भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए रिलायंस फाउंडेशन और गेट्स फाउंडेशन की संयुक्त पहल ‘शी-कनेक्ट्स डिजिटल एक्सेलेरेटर: इंडिया’ के पहले चरण के लिए छह गैर-सरकारी संगठनों (NGO) का चयन किया गया है। इन संस्थाओं को कुल 25.84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिसके जरिए अगले 15 से 18 महीनों में देशभर की करीब 10 लाख महिलाओं तक डिजिटल सेवाएं और समाधान पहुंचाए जाएंगे।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पहले चरण के चयनित संगठनों की घोषणा के साथ ही दूसरे चरण के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए गए। कार्यक्रम में सरकार, शिक्षा जगत, सामाजिक संस्थाओं, परोपकारी संगठनों और तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
रिलायंस फाउंडेशन में महिला सशक्तिकरण प्रमुख दीप्ति रेड्डी ने कहा कि महिलाओं को डिजिटल दुनिया में अवसर और आत्मविश्वास देना समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि डिजिटल रूप से सशक्त महिलाएं न केवल अपने जीवन में बदलाव लाती हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
वहीं, गेट्स फाउंडेशन में जेंडर इक्वालिटी की डिप्टी डायरेक्टर साची भल्ला ने कहा कि यह पहल गैर-सरकारी संगठनों को महिलाओं की डिजिटल भागीदारी बढ़ाने वाले प्रभावी मॉडल विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने का अवसर देगी। इस पहल से मिलने वाले अनुभव भारत के साथ-साथ अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इन 6 संस्थाओं का हुआ चयन
पहले चरण में जिन संस्थाओं का चयन किया गया है, उनमें—
- PCI इंडिया
- एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन
- माइना महिला फाउंडेशन
- डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन
- ASPIRE
- चैतन्य
शामिल हैं। ये संस्थाएं ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और तटीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए डिजिटल कौशल, स्वास्थ्य सेवाओं और आजीविका से जुड़े समाधान विकसित करेंगी।
दूसरे चरण के लिए आवेदन शुरू
दूसरे चरण के तहत भारतीय गैर-सरकारी संगठन आवेदन कर सकते हैं। चयनित प्रत्येक परियोजना को 4.2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 4 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
इस चरण में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो बड़े स्तर पर लागू की जा सकें और लंबे समय तक प्रभावी रहें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), चैटबॉट और क्षेत्रीय भाषाओं जैसी तकनीकों के माध्यम से महिलाओं की डिजिटल पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
चयनित संस्थाओं को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और क्षमता विकास कार्यक्रमों का भी लाभ मिलेगा।


