हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है. बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश को अर्पित होता है. इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा करने से न केवल विघ्न दूर होते हैं, बल्कि बुद्धि, व्यापार और संवाद कौशल में भी वृद्धि होती है.
भगवान गणेश को भी बुद्धि और विवेक का देवता कहा गया है. इसलिए बुधवार को गणेश जी की आराधना करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सफलता की राहें खुलती हैं. बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के कष्ट मिटते है और सुख समृद्दी आती है इसके साथ ही परिवार में सुख शांति बनी रहती है माना जाता है किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है इससे काम र्निविघन सम्पन्न होता है।
भगवान गणेश की पौराणिक कथा
एक बहुर्चित पौराणिक कथा के अनुसार एक बुढ़िया माता भगवान गणेश की भक्त थी वह रोज मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। लेकिन वो रोज गणेश की की प्रतिमा बनाए और वो रोज ही गल जाए। उसके घर के सामने एक बार किसी सेठजी का मकान बन रहा था। बुढ़िया माई ने मकान बनाने वाला कारीगरों से बोला- ‘ भाई। मेरे मिट्टी के बनाए गणेशजी रोज गल जाते हैं। आप मुझे पूजा के लिए पत्थर से एक गणेशजी बना दो, आप कृपा होगी।’
मकान बनाने वाला कारीगर बोला- माई! जितनी देर में हम तुम्हारे लिए गणेश जी बनाएंगे उतनी देर में हम दीवार पूरी कर देंगे। बुढ़िया ये सुनकर दुखी हुई और उसने कारीगर से बोला तुम्हारी दीवार टेढी बनेगी और दुखी मन से घर वापिस आ गई। दीवार पूरी करते- करते शाम हो गई लेकिन दीवार पूरी न हो सकी। कारीगर जितनी बार दीवार बनाएं उतनी बार वो टेढ़ी हो जाए।
शाम को सेठजी आए तो उन्होंने कहा आज कुछ काम नहीं किया? तब मकान बनाने वाला एक कारीगर सेठजी के पास गया और उसने बुढ़िया वाली बात बताई। तब सेठजी ने बुढ़िया माई के घर गए और उनसे कहा कि माई! तुम हमारी दिवार सीधी कर दो हम तुम्हें एक सोने के गणेश जी बनवाकर दे देंगे। गणेश जी ने ये सुनते ही सेठ जी की दीवार सीधी कर दी। सेठी जी ने बुढ़िया को सोने के गणेश जी बनवा कर दिए।
हे गणेश जी महाराज! जैसे आपने सेठ जी की दीवार सीधी करी वैसे ही हमारे भी सभी कार्य सीधे करना।


