ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी और केंद्र सरकार आमने सामने है। राहुल गांधी ने इस प्रोजेक्ट पर बड़े सवाल उठाए है, वही इस प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ते वि/वाद के बीच केंद्र सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि यह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक रूप से बेहद अहम है।
कुछ दिनों पहले ही लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार की 81,000 करोड़ रुपये की परियोजना पर सवाल उठाते हुए अपने बयान में BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि एक “प्रोजेक्ट” के नाम पर अंडमान-निकोबार में लोगों की ज़मीन छीनकर अडानी जी को सौंपी जा रही है। Forest Rights Act लागू नहीं हो रहा, सही मुआवज़ा तक नहीं मिल रहा। इसे पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के लिए खतरा बताया था । उन्होने कहा मैं और कांग्रेस पार्टी अंडमान और निकोबार के लोगों की आवाज़ बनकर उनके साथ खड़े हैं।
अब इसपर केंद्र् ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत होगी. इससे देश की समुद्री और रक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा. साथ ही यह द्वीप वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जुड़ेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. इस परियोजना के तहत एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाने की भी योजना है.
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के करीब 92,000 करोड़ का मेगा प्लान है, जिसमें ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट और पावर प्लांट बनेंगे। ग्रेट निकोबार द्वीप को रणनीतिक और आर्थिक हब बनाया जाएगा, लेकिन निकोबार द्वीप समूह के लोगों ने पर्यावरण और को लेकर चिंताएं भी जारी कि है।


