सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान शिव का पूजन और व्रत किया जाता है. भक्त शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और मनचाहे वरदान की कामना करते हैं. देवों के देव महादेव बहुत ही भोले माने जाते हैं, इसलिए उनका एक नाम भोलेनाथ भी है। पौराणिक मान्यतानुसार, भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए किसी भी तरह के खास विधि विधान की आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि कहा जाता है कि वह तो भोले हैं और भक्त की मन से की गई क्षणिक मात्र की भक्ति से ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। अगर भगवान शिव को प्रसन्न करता है, तो इसका सबसे सरल तरीका है शिवलिंग की पूजा.
शिवलिंग की पूजा अत्यंत विशेष मानी जाती है. इससे भगवान शिव जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं,
इस विधि से करें शिवलिंग की पूजा
सोमवार के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें. मंदिर में शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें. फिर शुद्ध जल से दोबारा अभिषेक करें. इसके बाद चंदन लगाएं. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, और भोग अर्पित करें. पूजा करने के दौरान ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप जरूर करें. आखिर में भगवान शिव की आरती करें। अगर घऱ के पास मंदिर है तो आप शिवलिंग पर रोज जल चढ़ा सकते है
शिवलिंग की पूजा में न करें ये गलतियां
शिवलिंग वैराग्य का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस पर सिंदूर अर्पित नही करना चाहिए. इतना ही नहीं इस पर हल्दी और कुमकुम भी कभी न चढ़ाएं. हल्दी का संबंध सौंदर्य और सौभाग्य होता है. इसका उपयोग मां पार्वती की पूजा में होता है. शिवलिंग पर भूलकर भी कभी तुलसी न चढ़ाएं. तुलसी को भगवान शिव के भोग या पूजा में वर्जित माना गया है. शिवलिंग पर कभी भी टूटे चावल न चढ़ाएं. टूटे चावल अपूर्णता का प्रतीक माने जाते हैं. शिवलिंग पर कभी शंख से जल न चढ़ाएं। ताबें के पात्र से दूध नही चढ़ाने चाहिए।


