हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 के मुकाबले 2025 में पराली जलाने की घटनाएं 91 प्रतिशत कम हुई हैं। सरकार ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए पराली प्रबंधन, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाई है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि राज्य में करीब 79.7 लाख टन धान की पराली पैदा होती है। इसके प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू उपायों के साथ चारे के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2025 में 21.9 लाख टन पराली का एक्स-सीटू उपयोग हुआ, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 27.1 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।

पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट गांवों में निगरानी के लिए करीब 50 ड्रोन लगाए जाएंगे। जले हुए खेतों का सत्यापन मोबाइल एप के जरिए किया जाएगा।

सड़क की धूल कम करने के लिए 1,162 किलोमीटर सड़कों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 675 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। वहीं, 81 जरूरी बड़ी और मध्यम रोड स्वीपिंग मशीनों में से 78 तैनात की जा चुकी हैं।

राज्य में 1,309 औद्योगिक इकाइयों की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी और कार्रवाई को और तेज किया जाएगा।

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