देश में गंगा दशहरा की धूम है, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के साथ प्रदेश के कई शहरों में घाटों पर डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी ।
गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करते समय दस डुबकी लगाने की परंपरा है। माना जाता है गंगा दश-हरा यानि दस पापों का हरण, गंगा दशहरा के शुभ संयोग में मां गंगा दस प्रकार के पाप दोषों का हरण कर लेती हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में शुभता का संचार होता है।
काशी के अस्सी घाट पर मां गंगा को 5100 साड़ियों की चुनरी चढ़ाई गयी 501 लीटर दूध से गंगा का अभिषेक भी किया गया। काशी में इस दिन विशेष आरती की परंपरा है जो आज शाम को की जाएगी। काशी के घाटों पर हजारों श्रद्धालु भजन कीर्तन करते हुए पहुंच रहें है। काशी में सुबह से अभी तक करीब 1.50 लाख श्रद्दालु गंगा में डुबकी लगा चुके है।
गंगा दशहरा पर गंगा पूजन के दौरान दस प्रकार के पुष्प,फल, दीपक, नैवेद्य, पान के पत्ते अर्पण कर पूजा की जाती है। इसके साथ ही सनातन धर्म में दान दक्षिणा की भी परंपरा है इस दिन दस ब्राह्मणों को दक्षिणा और भोजन करने की भी परंपरा है जो काफी शुभ माना जाता है। इस साल गंगा दशहरा पर अधिक मास का संयोग है जो इस दिन को और भी शुभ बना रही है।
अयोध्या के सरयू घाट परभी श्रद्धालु दान पुण्य करते हुए नजर आ रहें है हरिद्वार के हरिकी पौड़ी के ब्रह्मकुंड पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु नजर आ रहे हैं ।


