इस्लाम धर्म का सबसे खास त्योहार ईद-उल-अजहा की आज पूरे देश में धूम है । कई लोगों ने चंडीगढ़ सेक्टर 20 की जामा मस्जिद में सुबह ईद की नमाज को अदा किया । भारत में ईद-उल-अजहा को बकरीद भी कहा जाता है।
ईद-उल-अजहा को कुर्बा/नी की ईद के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस दिन कुर्बा/नी दी जाती है। इस्लामी कैलेंडर के आखिरि महीने जिल हिज्जा की 10 तारीख को मनाया जाता है । इस त्योहार को त्याग,समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का पर्व माना जाता है।
वही नोएडा में पूरे जिले में पुलिस अलर्ट मोड पर है। ईद-उल-अजहा पर बम और डॉग स्क्वॉड के साथ पुलिस ने तीनों जोन में पैदल मार्च किया। मस्जिदों के आसपास पुलिस बल तैनात रहा। नमाज अदा करने कई लोग निठारी मस्जिद, जामा मस्जिद पहुंचे है। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, ईद-उल-अजहा का सीधा संबंध हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे हजरत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) के एक महान इम्तिहान से है..
मान्यता है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के ख्वाब में आकर उनकी सबसे प्यारी चीज कु/र्बा/न करने का हुक्म दिया था. हजरत इब्राहिम के लिए उनके बेटे हजरत इस्माइल सबसे अजीज थे. अल्लाह की रजा के लिए हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बा/नी देने को तैयार हो गए थे. जैसे ही उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छु/री चलाई, अल्लाह ने उनके जज्ब को कुबूल कर लिया। इसी ऐतिहासिक क्षण की याद में हर साल दुनिया भर के मुसलमान अल्लाह की राहमत के लिए जानवरों की कुर्बा/नी देते हैं, जिसे ‘सुन्नत-ए-इब्राहिमी’ भी कहा जाता है.


