पुराणों के मुताबिक भगवान गणेश देवताओं में प्रथम पूज्य हैं यानी इनकी पूजा सभी देवताओं (God) से पहले की जाती है।  शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सबसे आसान तरीका है मोदक का भोग। अगर आपने मोदक का भोग नहीं लगया तो समझ लीजिए गणेश जी को आपका छप्पन भोग भी पसंद नहीं आएगा। इसका कारण यह है कि गणेश जी को सबसे प्रिय मोदक है। गणेश जी का मोदक प्रिय होना भी उनकी बुद्धिमानी का परिचय है। भगवान गणेश को खुश करना बहुत ही आसान है। जैसे भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष सामग्री और विधि की जरूरत नहीं होती है उसी प्रकार भगवान गणेश को खुश करना भी सरल है। शास्त्रों में भगवान गणेश को खुश करके उनका आर्शिवाद पाने के उपाय बताये गये है।

आप भी इन सरल उपायों को जानिए और प्रभु गणेश को खुश करें

1-दूर्वा

गणेश जी को खुश करने का सबसे सस्ता और आसान उपाय है दूर्वा से गणेश जी की पूजा करना। दूर्वा गणेश जी को इसलिए प्रिय है क्योंकि दूर्वा में अमृत मौजूद होता है।

2-मोदक चढ़ाएं

गणेश जी को प्रसन्न करने का दूसरा सरल तरीका है मोदक का भोग। गणेश भगवान को मोदक विशेष पसंद है। गणपति अथर्वशीर्ष में लिखा है कि जो व्यक्ति गणेश जी को मोदक का भोग लगाता है गणपति उनका मंगल करते हैं। मोदक का भोग लगाने वाले की मनोकामना पूरी होती है। शास्त्रों में मोदक की तुलना ब्रह्म से की गयी है। मोदक भी अमृत मिश्रित माना गया है।

3-घी

जो व्यक्ति गणेश जी की पूजा घी से करता है उसकी बुद्धि प्रखर होती है। घी से गणेश की पूजा करने वाला व्यक्ति अपनी योग्यता और ज्ञान से संसार में सब कुछ हासिल कर लेता है। घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। भगवान गणेश को घी काफी पसंद है। गणपति अथर्वशीर्ष में घी से गणेश की पूजा का बड़ा महात्म्य बताया गया है।

 

भगवान गणेश को मोदक का भोग चढ़ाने की दो कथा

भगवान गणेश का प्रिय भोग मोदक है। इसे लेकर धर्म-अध्यात्म में कई कहानियां प्रचलित हैं। इनमें से एक कहानी ये है कि एक बार ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया ने सभी देवताओं को भोजन पर आमंत्रित किया। वहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ भोजन कर रहे थे। माता अनुसूया भगवान गणेश को लगातार भोजन परोसती रहीं, पर वह तृप्त ही नहीं हो रहे थे। जब भोजन की आखिरी थाली बची तो माता अनुसूया ने उनकी थाली में भोजन की बजाय मोदक रख दिया। इसे खाते ही उन्हें जोर की डकार आई। यह संतुष्टि और तृप्ति का इशारा था। इसके तुरंत बाद भगवान शिव को 21 डकारें आई। यह देखकर माता पार्वती बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि जो कोई भी भगवान गणेश को 21 मोदक का प्रसाद चढ़ाएगा, उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

दूसरी कहानी

इससे संबंधित दूसरी कहानी यह है कि एक बार भगवान शिव विश्राम कर रहे थे। गणेश जी इसमें विघ्न की शंका से द्वार पर पहरा दे रहे थे। उसी दौरान परशुराम वहां पहुंचे और शिव जी से मिलने की इच्छा जताई। भगवान शिव को विश्राम करते देख गणेश जी ने उन्हें द्वार पर ही रोक दिया। इससे परशुराम क्रोधित हो गए और गणेश जी से युद्ध करने लगे। इस युद्ध में परशु के प्रहार से गणेश जी का एक दांत टूट गया। उन्हें खाने में तकलीफ हुई तो माता पार्वती ने उन्हें नरम मोदक बनाकर दिए। मोदक काफी मुलायम होता है जिससे इसे चबाना नहीं पड़ता है। यह मुंह में जाते ही घुल जाता है और इसका मीठा स्वाद मन को आनंदित कर देता है। मोदक गणेश जी को बहुत पसंद आया । तब से ही मोदक उनका प्रिय भोग है।

मोदक का आकार धन की पोटली की तरह

मोदक का आकार धन की पोटली की तरह होता है। इसलिए इसे धन और सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा इसका आकार ऊपर की ओर इशारा करते हुए त्रिकोण सा नजर आता है। इसलिए इसे शिव और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी माना जाता है। इसिलिए आप भी इस धन की पोटली को भगवान गणेश को अर्पित करें और अपनी मनोकामनाएं पूरी करें साथ में खूब सारा आर्शिवाद भी पाएं।

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