मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी प्रदेश की असली ताकत उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि युवाओं के ज्ञान, शोध और नई सोच से होती है। सरकार का लक्ष्य हरियाणा को अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान आधारित विकास का प्रमुख केंद्र बनाना है।

पंचकूला में उच्च शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध केवल रिसर्च पेपर या किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा फायदा समाज और आम लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने शोधकर्ताओं से जल प्रबंधन, भूजल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और कृषि जैसे विषयों पर काम करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि के तहत 90 शोध परियोजनाओं को 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के समाधान में शोध का उपयोग करना है।

उन्होंने कहा कि कम पानी में अधिक फसल उत्पादन, मिट्टी की सेहत सुधारने और फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर शोध की जरूरत है। साथ ही बायोटेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं को आगे बढ़ना होगा।

शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि सरकार शोध को पेटेंट, तकनीक और रोजगार से जोड़ने पर काम कर रही है। वहीं, शोधकर्ताओं के लिए 5,000 पेटेंट का लक्ष्य रखा गया है और वर्ष 2030 तक 1,000 पेटेंट का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

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