लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर आ/ग लगने से 15 लोगों की मौ/त होने की जानकारी सामने आई है औऱ न जाने कितने मासूम अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहें है।

यह इमारत एक ‘डे/थ ट्रैप’ बन गई, बन गई क्योंकि इसमें आने-जाने का सिर्फ एक ही  संकरा रास्ता था.  उस अकेले रास्ते में एयर-कंडीशनिंग पैनल, उलझे हुए तार और दूसरे उपकरण लगे हुए थे, जिससे आग फैलने पर अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने के लिए बहुत कम जगह बची थी.

मामले में आए नए अपडेट के मुताबिक, अग्निकांड में एलडीए की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं. एलडीए उपाध्यक्ष ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है

जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग का मैप आवासीय उपयोग के लिए अप्रूव कराया गया था. लेकिन  बिल्डिंग का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया, जांच में यह भी सामने आया है कि  2016 में अवैध निर्माण के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण आदेश भी किया गया था लेकिन  बाद में  आदेश को निरस्त कर दिया गया था. दुर्गेश श्रीवास्तव ने आदेश को निरस्त किया था।

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