पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य अपने हिस्से के पानी की एक बूंद भी किसी को नहीं देने देगा। पंजाब विधानसभा में नदी के पानी पर राज्य के अधिकारों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने हक के लिए अदालत से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ेगी।
मान ने आरोप लगाया कि राजस्थान पंजाब से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल मुफ्त में कर रहा है और उद्योगों को पानी देकर आर्थिक लाभ कमा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से पंजाब का बकाया रॉयल्टी दावा करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रावी और ब्यास नदियों के पानी पर राजस्थान और हरियाणा का कोई अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने सिंचाई व्यवस्था में सुधार करते हुए नहर के पानी की पहुंच चार साल में 22 प्रतिशत खेतों से बढ़ाकर करीब 80 प्रतिशत तक कर दी है। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि कंडी नहर को करीब चार दशक बाद फिर से चालू किया गया है। पठानकोट, अमृतसर और गुरदासपुर में आठ नई नहरें भी शुरू की गई हैं। सरकार के प्रयासों से 60.80 लाख एकड़ जमीन तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जा रहा है।
मान ने कहा कि पंजाब के किसानों ने देश के खाद्यान्न भंडार में बड़ा योगदान दिया है। इसलिए राज्य के जल संसाधनों के मामले में भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र से सतलुज-यमुना लिंक का नाम बदलकर यमुना-सतलुज लिंक करने और हरियाणा के अतिरिक्त पानी में पंजाब को उसका हक देने की मांग भी की।


