मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा की जाए तो जीवन में खुशहाली आती है और संकट दूर हो जाते हैं. हनुमानजी की पूजा करना बहुत ही सरल है लेकिन उसके नियम और सावधानियां जानना जरूरी है। पूर्ण भक्तिभाव के साथ ही पवित्र नियम से उनकी पूजा करने से वे बहुत जल्द ही प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करते हैं
वहीं, मंगलवार के दिन पूजा करने पर कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत हो जाती है. ऐसे में जानिए किस तरह मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा संपन्न की जा सकती है.
मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा
मंगलवार के दिन सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नान के बाद बजरंगबली का स्मरण किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन व्यक्ति को अपने मन और मस्तिष्क को शुद्ध रखना होता है. हाथ में जल भरकर शुभ मंत्रों का जाप किया जाता है. मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना जाता है. बजरंगबली की पूजा शाम के समय की जाती है.
पूजा करने के लिए हनुमान मंदिर जाते हैं. मंदिर में जाकर हनुमान जी को सिंदूर से तिलक लगाया जाता है.बजरंगबली के समक्ष दीपक जलाते हैं और हनुमानजी को अनामिका अंगुली से तिलक लगाएं, सिंदूर अर्पित करें, गंध, चंदन आदि लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं।
चने व गुड़ के अलावा बूंदी को भोग में लगाते हैं. सभी भक्तों को पूजा के बाद बूंदी बांटी जाती है. बजरंगबली के साथ ही इस दिन महादेव का पूजन भी किया जाता है. बजरंगबली की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करके पूजा का समापन होता है.
हनुमान पूजा एक पवित्र जगह पर बैठकर ही करना चाहिए। खासकर या तो आपके घर के पूजास्थल पर, मंदिर में, तीर्थ क्षेत्र में या पहले से नियुक्त साफ सफाई करके पवित्र की गई जगह पर।
व्रत में क्या खाएं
व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के खानपान में केवल शाकाहारी चीजों का ही सेवन करना होता है. हनुमानजी का व्रत रख रहे हैं तो नमक, मिर्च और अनाज के सेवन से बचें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन ना किया जाए.
ध्यान देना की बातें
हनुमान पूजा के पहले दीप प्रज्वलित जरूर करें। दीपक में जो बाती लगाई जा रही है वह भी लाल सूत (धागे) की होनी चाहिए। किसी भी स्थल पर पूजा करने के पूर्व दीप जरूर प्रज्वलित करें। हनुमान पूजा के दौरान जो दीपक जला रहे हों उसमें चमेली का तेल या शुद्ध घी होना चाहिए।
हनुमान मूर्ति या चित्र को लकड़ी के पाठ पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें और खुद कुश के आसन पर बैठकर ही पूजा करें।
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