विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समृद्धि, बुद्धि और अच्छे भाग्य का देवता माना जाता है माना जाता है कि भगवान गणेश, मनुष्यों के कष्ट हर लेते है और उनकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। परंपरा के अनुसार, हर धार्मिक उत्सव और समारोह की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से ही होती है। गणेश भगवान का रूप, मनुष्य और जानवर के अंग से मिलकर बना हुआ है। जो गहरे आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।
ऐसा माना जाता है कि अगर आपकी सफलता के रास्ते में कोई बाधा आती है तो भगवान गणेश की पूजा करने से दूर हो जाती है। भगवान गणेशजी की एक पत्नी सिद्धि है। भगवान गणेश को विघ्नहर यानी सभी बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। वे हर शुभ कार्य की शुरुआत में राह में आने वाली हर मुश्किल को शांत कर देते हैं। इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य को उनके आशीर्वाद के बिना शुरू करना अशुभ माना जाता है। भगवान गणेश को सभी दुखों का हर्ता, संकट दूर करने वाला, सद्बुद्धि देने वाला माना जाता है। उनकी पूजा करने से आध्यात्मिक समृद्धि मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
भगवान गणेश की पूजा करने से मनुष्य के मन में भरा अहंकार मिट जाता है।भगवान गणेशजी की सवारी चूहा जो कि उनके पास ही बैठता है, हमेशा दर्शाता है कि कोई भी व्यक्ति अहंकार का त्याग करके सच्चे मन से सेवा भाव को अपना सकता है। भगवान गणेश सदैव बाएं पैर को दाएं पैर रखकर बैठते हैं, जो उनके ज्ञान को दर्शाता है कि वह हर बात को अलग नजरिए से देखते हैं। यह दर्शाता है कि एक सफल जीवन जीने के लिए ज्ञान और भावनाओं का सही उपयोग करना चाहिए।
पूजा विधि
बुधवार को सुबह जल्दी उठें और भगवान गणेश का ध्यान करें।
इसके बाद स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
अब एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और गणेश जी की प्रतिमा विराजमान करें।
अब प्रभु को माला और दूर्वा घास अर्पित करें।
इसके बाद देशी घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
गणेश चालीसा का पाठ और मंत्रों का भी जप करें।
अंत में बूंदी का लड्डू या फिर मोदक का भोग लगाएं।
गरीब लोगों में अन्न, धन और भोजन का दान करें।


