अमेरिका ईरान की इस्लामाबाद में हुई वार्ता किसी समझौते तक नही पहुंची इसका एक कारण यह है कि परामाणु समझौते पर दोनो देशों में बात नही बनी । इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता में ईरान ने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अमेरिका 20 साल की शर्त पर अड़ा रहा। इस असहमति के कारण दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका।
उपराष्ट्रपति जेड़ी वेंस ने इस बात की जानकारी दी थी ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया उन्होने कहा कि हमें ईरान से प्रतिबद्धता चाहिए कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने का प्रयास नही करेगा और इसके साथ ही परमाणु उपकरण हासिल करने की कोशिश नही करेगें जिसमें वे जल्द से जल्द परमाणु हथियार न बना सकें। हालांकि ईरान ने कहा कि वो जनता के लिए परमाणु एनर्जी विकसित करना चाहता है, जिसका इस्तेमाल देश की जनता के लिए किया जा सके।
चीनी टैंकर ने होर्मुज पार किया
वही वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिकी नेवी अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगी। ट्रंप के इस नाकेबंदी का असर ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह पर है। अमेरिका की नाकाबंदी के बीच ‘रिच स्टार्री’ नाम का एक चीनी टैंकर होर्मुज पार कर फारस की खाड़ी से बाहर निकल गया है। शिपिंग डेटा के मुताबिक, नाकाबंदी लागू होने के बाद ऐसा करने वाला यह पहला जहाज है।
वही चीन ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की कथित नाकेबंदी को ‘खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना’ बताया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिल जाते हैं, तो उसका वैश्विक प्रभाव और खतरनाक हो सकता है।उन्होंने ट्रम्प की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार रखने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इसे अमेरिका की स्पष्ट ‘रेड लाइन’ बताया।


