चंडीगढ़, 25 जून: हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता अनिल कपूर और दिग्गज निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर हाल ही में उत्तराखंड के पावन नगरी ऋषिकेश पहुँचे, जहाँ उन्होंने गंगा आरती में भाग लिया और परमार्थ निकेतन आश्रम में अपने दिवंगत माता-पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह यात्रा केवल एक आध्यात्मिक प्रवास नहीं थी, बल्कि एक बेटे के भावपूर्ण कर्तव्य और आत्मिक आभार की सशक्त अभिव्यक्ति थी। अनिल और बोनी कपूर की मां, श्रीमती निर्मल कपूर जी का कुछ सप्ताह पूर्व निधन हुआ था। इस अपूरणीय क्षति से कपूर परिवार गहरे शोक में है।

गंगा तट पर बहा भावनाओं का सैलाब

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी की उपस्थिति में अनिल और बोनी कपूर ने गंगा माता की आरती की। सूर्यास्त के समय बहती गंगा के तट पर जलते दीपों और मंत्रोच्चार के बीच का वातावरण अत्यंत धार्मिक, शांत और आत्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था।

गंगा आरती के दौरान अनिल और बोनी कपूर ने अपने माता-पिता – श्री सुरिंदर कपूर और श्रीमती निर्मल कपूर को श्रद्धांजलि स्वरूप गंगाजल अर्पित किया, जिसे ‘श्रद्धाजलि’ कहा गया। यह क्षण इतना भावुक था कि आसपास उपस्थित कई श्रद्धालुओं की भी आंखें नम हो गईं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का आशीर्वाद और संदेश

स्वामी जी ने अनिल और बोनी कपूर को पुष्पहार पहनाकर, और रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने दोनों भाइयों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे अपने फिल्मों के माध्यम से धर्म, सेवा, संस्कार और संवेदनशीलता को बढ़ावा दें।

स्वामी जी ने कहा: “कपूर परिवार भारतीय संस्कृति, परंपरा और फिल्म के माध्यम से आज के युवाओं को न केवल मनोरंजन बल्कि मूल्य और प्रेरणा भी प्रदान करता है। यह कार्य सेवा के ही समान है।”

अनिल और बोनी कपूर की भावुक श्रद्धांजलि

इस पावन अवसर पर अनिल कपूर ने कहा: “हम जो कुछ भी हैं, जो भी मूल्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण हमारे जीवन में है, वो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिला है। मां और पिताजी का आशीर्वाद हमारे हर निर्णय और कर्म में आज भी साथ है।”

बोनी कपूर ने भी इस यात्रा को एक आध्यात्मिक और आत्मशुद्धि का अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि: “परमार्थ निकेतन का वातावरण मन को गहरी शांति देता है। गंगा आरती में शामिल होकर ऐसा लगा मानो माँ की आत्मा से सीधा संवाद हो रहा हो।”

एक यात्रा, जो केवल तीर्थ नहीं, श्रद्धा थी

यह यात्रा एक साधारण धार्मिक दर्शन नहीं थी, बल्कि दो बेटों की ओर से संस्कारों, कृतज्ञता और आत्मीय श्रद्धा की पूर्ण अभिव्यक्ति थी। ऋषिकेश की निर्मल हवा, गंगा की बहती धारा और मंत्रों की गूंज में अनिल और बोनी कपूर का यह क्षण उनके जीवन का अत्यंत भावुक अध्याय बन गया।

 

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