देश भऱ में आज से गणेश उत्सव मनाया जा रहा हैं, अमूमन देश के सभी हिस्सों में इस उत्सव की धूम रहती हैं लेकिन महाराष्ट्र की बात ही निराली होती हैं, यहां की मूर्तियों की बात करें तो बड़ी विशाल और अद्भुत होती हैं, इन्हीं मूर्तियों में एक मूर्ति हैं ‘लालबागचा राजा’ की, हर साल की तरह इस बार भी ‘लालबागचा राजा’ के दर्शन के लिए मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के सबसे लोकप्रिय और श्रद्धेय गणपति ‘लालबागचा राजा’ के इस साल के स्वरूप की एक झलक पाने के लिए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है. इस बार लालबागचा राजा का रूप अत्यंत मनमोहक और दिव्य नजर आ रहा है. बप्पा के हाथ में चक्र, सिर पर आकर्षक मुकुट और बैंगनी रंग की धोती ने इस साल की प्रतिमा को खास बना दिया है. गणेश भक्तों ने जैसे ही इस रूप को देखा, पूरा पंडाल ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंज उठा. बता दें कि लालबागचा राजा, गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान, महाराष्ट्र के मुंबई स्थित लालबाग में स्थापित सार्वजनिक गणेश प्रतिमा है. यह प्रतिमा 11 दिनों तक भक्तों को दर्शन देती है. उसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गिरगांव चौपाटी पर प्रतिमा को अरब सागर में विसर्जित कर दी जाती है.वहीं इस प्रतिमा के दर्शन के लिए 10 दिन तक भीड़ लगी रही हैं, वहीं आज मनसे प्रमुख “राज ठाकरे” ने अपने परिवार के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना की और उनसे आर्शीवाद लिया, आज गणेश चतुर्थी शुरु होते ही बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित हुए और आरती में शामिल हुए, इस बार लालबागचा राजा की मूर्ति को एक अनूठी थीम पर सजाया गया है, जिसमें भगवान तिरुपति बालाजी की दिव्यता भी दिख रही है. दर्शन के लिए आए लोग ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयकारा लगाते हुए मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं. मंदिर के अंदर गणेश जी की विशाल मूर्ति जो सोने और रंग-बिरंगी सजावट से सुशोभित है. ऊपर से लटकी हुई भव्य फूलों की आकृति और चारों ओर की नक्काशीदार दीवारें इसे और भी अद्भुत बना रही है. 1934 से लालबागचा राजा को सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा आयोजित किया जाता हैं और इसे नवसाचा गणपति के रूप में जाना जाता है. इस साल ये अपना 92वां गणेश उत्सव मना रहा हैं, वहीं आप को बतादें आज गणेश चतुर्थी पर चित्रा नक्षत्र, बुधवार और भाद्रपद महीने की चतुर्थी तिथि से शुभ संयोग बन रहा है। गणेश पुराण में बताया गया है कि ऐसे ही संयोग में देवी पार्वती ने दोपहर के समय गणपति की मूर्ति बनाई थी, जिसमें भगवान शिव ने प्राण डाले थे इसीलिए आज गणपति की स्थापना के लिए शाम 6.11 तक शुभ मुहूर्त रहेंगे। भादौ महीने की इस गणेश चतुर्थी पर गणपति को सिद्धि विनायक रूप में भी पूजने का विधान है, आपको बतादें इस रूप की पूजा भगवान विष्णु ने की थी और ये नाम भी दिया।

हर मांगलिक काम में होती हैं पूजा – गणेश जी के सिद्धि विनायक रूप की पूजा हर मांगलिक काम से पहले होती है। माना जाता है गणेश जी का ये रूप सुख और समृद्धि देने वाला होता है। इनकी पूजा से हर काम में सफलता मिलती है। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक कहते हैं। गणेश पूजा जल, दूध, लाल चंदन, पंचामृत, मौली, अष्टगंध, अक्षत, अबीर, गुलाल,लौंग, इलाइची, केसर, घी का दीपक, कत्थे वाला पान, मोदक या लड्डू, धूप, फूल, कपूर, सुपारी से की जाती हैं, वैसें सभी भक्त अपनी सुविधानुसार इनकी व्यवस्था करतें हैं, रिपोर्ट न्यूज पीडिया 24

 

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