हरियाणा के पंचकूला का माता मनसा देवी मंदिर बेहद खास है। इस मंदिर का इतिहास बड़ा ही प्रभावशाली है। माता मनसा देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में मेला लगता है। जिसके चलते यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। यहां लोग माता से अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि माता मनसा देवी से मांगी गई हर मुराद माता जरुर पूरी करती है। कहा जाता है कि जिस जगह पर आज मां मनसा देवी का मंदिर है, यहां पर सती माता के मस्तक का आगे का हिस्सा गिरा था। मनसा देवी का मंदिर पहले मां सती के मंदिर के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि मनीमाजरा के राजा गोपालदास ने अपने किले से मंदिर तक एक गुफा बनाई हुई थी, जो लगभग 3 किलोमीटर लंबी है। वे रोज इसी गुफा से मां सती के दर्शन के लिए अपनी रानी के साथ जाते थे। जब तक राजा दर्शन नहीं करते थे, तब तक मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते थे
माता मनसा देवी का इतिहास
माता मनसा देवी का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि अन्य सिद्ध शक्तिपीठों का। माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर 1811-1815 में पूर्ण करवाया था। इसके निर्माण में चार साल लगे थे। एक कहानी के अनुसार, शिवालिक पहाड़ियों में, एक गाय प्रतिदिन आती थी और पहाड़ी की चोटी पर तीन सटे पत्थरों (पिंडियों) पर दूध चढ़ाती थी। स्थानीय निवासियों द्वारा यह देखा गया कि वहां तीन पवित्र शिलाएं उत्पन्न हुईं है और फिर सती माता का मस्तक निकला फिर उनकी पूजा की जाने लगी
मनसा देवी के मुख्य मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का रूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी और सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णों देवी, भैरव की मूर्तियां एवं शिवलिंग स्थापित है। 9 सितम्बर 1991 को हरियाणा सरकार ने माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड का गठन करके मनसा देवी परिसर को अपने हाथ में ले लिया था।
जाने मंदिर क्षेत्र के बारे में
शिवालिक पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसा यह सुंदर मंदिर परिसर हरियाणा के पंचकूला जिले में मणि माजरा के पास बिलासपुर गाँव की सीमा से लगे 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। मनसा देवी मंदिर ने शक्ति (मनसा देवी) की पूजा के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल होने की पवित्रता बनाए रखी है, जो कि जन्मजात ब्रह्मांडीय ऊर्जा का दिव्य स्त्री रूप है, जिसे हिंदू धर्म और शक्तिवाद में ब्रह्मांड की शक्तियों का प्रतीक और शासन करने वाला कहा जाता है। पूरा मंदिर परिसर शिवालिक तलहटी के लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर का मुख्य आकर्षण एक प्राचीन वृक्ष है जिसके चारों ओर भक्त अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर पाने के लिए पवित्र रक्षा सूत्र बांधते हैं। नवरात्र के दिनों में माता के दर्शन के लिए लंबी लंबी कतारे लगी रहती है क्योंकि सभी भक्त अपनी मुरादों को पूरा करने के लिए माता से प्रार्थना करने के लिए आते है, और मुराद पूरी होने के बाद भक्त अपनी इच्छानुसार सभी को प्रसाद बांटते है,,,तो आप भी इस नवरात्र माता मनसा देवी के दर्शन ज़रुर करें,,,जय माता दी, रिपोर्ट न्यूज पीडिया 24