भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर शुक्रवार को पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। कांग्रेस के तमाम नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके जीवन को प्रेरणा का प्रतीक बताया।मनमोहन सिंह ने 2004 के आम चुनाव के बाद 22 मई 2004 को प्रधानमंत्री के रूप के शपथ ली और 22 मई 2009 को दूसरी बार प्रधानमंत्री बने । मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर को 92 वर्ष की उम्र में नि/धन हो गया. उन्हें एक अर्थशास्त्री के रूप में ट्रेंड किया गया था और उन्होंने भारत को विकास पथ पर ले जाना अपना मिशन बना लिया. उनकी DPhil भारतीय निर्यात के ट्रेंड और संभावनाओं पर ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी से थी. आखिरकार उन्होंने इसका अच्छा उपयोग तब किया जब उन्होंने प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री के रूप में देश को गंभीर आर्थिक संकट से बाहर निकाला.
उनके द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने देश का चेहरा इस तरीके से बदल दिया कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. आर्थिक सुधारों के रूप में करार दी गई इन आर्थिक उदारीकरण की नीतियों ने देश को संयुक्त राज्य अमेरिका के करीब ला दिया, जिससे यह धीरे-धीरे अपनी समाजवादी जड़ों को इस तरह से त्यागने लगा, जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी. 10 साल देश के प्रधानमंत्री रहने के दौरान उनके ऊपर कम बोलने और जवाब नहीं देने के आरोप लगें वो अपने शायराना अंदाज से भी बहुत मशहूर रहे उन्होंने एक बार सुषमा स्वराज से इसी अंदाज में जबाब दिया था
“माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूं मैं,
तू मेरा शौक़ तो देख, मेरा इंतज़ार तो देख.”
जब सांसद में दिखा था मनमोहन सिंह में दिखा ये शायराना अंदाज, सुषमा स्वराज भी लगी थीं मुस्कुरानें
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कांग्रेस ने उन्हें 21वीं सदी के भारत के स्वर्णिम युग का निर्माता बताते हुए उनकी समावेशी विकास और राजनीतिक शुचिता की विरासत को नमन किया। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पोस्ट करके लिखा, ”भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें मेरा सादर नमन। राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी अटूट निष्ठा, गरीबों और वंचितों के लिए उनके साहसिक निर्णय, और मजबूत अर्थव्यवस्था के निर्माण में उनका ऐतिहासिक योगदान हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनकी सादगी, विनम्रता और ईमानदारी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हम राष्ट्र निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को याद करते हैं। वे भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक सौम्य निर्माता थे। विनम्रता और बुद्धिमत्ता के धनी, वे शांत और गरिमापूर्ण व्यवहार करते थे और अपने कार्यों से अपनी बातों को ज्यादा प्रभावशाली बनाते थे
भारत का तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उदय हुआ
1991 तत्कालीन वित्तमंत्री के रुप में डॉ. मनमोहन सिंह के समय में विदेशी कंपनियों को देश में अपना व्यापार जमाने के लिए एंट्री की इजाजत दी. साथ ही कई नियमों में बदलाव भी किया गया. इस बजट को ऐतिहासिक बजट वाला साल भी कहा जाता है
गरीबी में कमी: गरीबी में कमी इन सुधारों का एक प्रमुख परिणाम रहा है। अधिक लोगों के गरीबी से बाहर आने के साथ, कर आधार व्यापक हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप कर संग्रह में वृद्धि हुई है।
धन में वृद्धि: राजस्व में इस वृद्धि ने सरकार को कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढाँचे और अन्य विकास परियोजनाओं में निवेश करने में सक्षम बनाया है, जिसका प्रमुख उद्देश्य आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना है। रिपोर्ट न्यूज पीडिया 24


