जानिए भगवान गणेश को क्यों पसंद है दूर्वा? और चढ़ाई गई दूर्वा का क्या करें?

हिंदू धर्म में दूर्वा को बहुत ही पूजनीय माना जाता है। भगवान गणेश को  मोदक और लड्डू के अलावा एक और चीज सबसे ज्यादा प्रिय है? दूर्वा भगवान गणेश को बेहद प्रिय है यह कोई फूल या फल नहीं बल्कि एक खास तरह की घास है। ऐसा माना जाता है दूर्वा के बिना गणेश जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। उनकी पूजा में इस घास को जरूर चढ़ाया जाता है । बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होती है। कभी यह सोचा  है आपने कि आखिर क्यों गणपति की पूजा में दूर्वा को इतना महत्व दिया जाता है ?

गणेश जी को क्यों पसंद है दूर्वा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक राक्षस था, जो धरती और स्वर्ग दोनों जगहों पर आतंक मचा रहा था। वह ऋषि-मुनियों और आम लोगों को निगल जाता था, जिससे चारों तरफ हाहाकार मच गया। जब सभी देवता अनलासुर से परेशान हो गए, तो उन्होंने भगवान गणेश से मदद मांगी।

भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया। राक्षस को निगलने के बाद, गणेश जी के पेट में बहुत जलन होने लगी। जब बहुत कोशिशों के बाद भी जलन शांत नहीं हुई, तो कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा घास की 21 गांठें खाने को दीं। जैसे ही गणेश जी ने दूर्वा खाई, उनकी जलन शांत हो गई। तब से ही गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय हो गई और उनकी पूजा में दूर्वा घास चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

ज्योतिष शास्त्र में दूर्वा के कुछ खास उपाय बताएं गये है, जिन्हें आप भी कर सकते है-

गृह क्लेश शांत करने के लिए

बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करें. उनको दूर्वा ​अर्पित करें. उसके बाद कुछ हरी दूर्वा लेकर उसे गाय को खिलाएं. य​ह उपाय 11 बुधवार करने से गृह क्लेश शांत होगा. परिवार में सुख और शांति आएगी. परिवार में प्रेम बढ़ेगा और बुध दोष फिर दूर होगा.

आ​र्थिक संकट और दरिद्रता को दूर करने के लिए

आ​र्थिक संकट और दरिद्रता को दूर करने के लिए शुक्रवार के दिन दूर्वा और शुद्ध घी मिलाकर दीपक जलाएं. उसे गणेश जी की मूर्ति के सामने रखें. फिर ओम लक्ष्मी गणपतयै नमः मंत्र का जाप 108 बार करें.

शत्रुओं पर विजय और कोर्ट केस से मुक्ति के लिए

शत्रुओं पर विजय और कोर्ट केस से मुक्ति के लिए बुधवार को गणेश जी को 21 ​दूर्वा अर्पित करें और ॐ विघ्ननाशाय नमः मंत्र का जाप करें. यह तब तक करना है, जब तक आप सफल न हो जाएं.

गणपति बप्पा को हरी, ताजी और 3 या 5 नोक वाली दूर्वा लेने चाहिए. दूर्वा को किसी मंदिर स्थान या साफ-सुथरी जगह से तोड़कर लाएं तो और भी अच्छा रहता है, फिर उसे पानी से अच्छे से धोकर साफ कर लें. गणेश जी को 11 या 21 दूर्वा चढ़ाना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करते हुए दूर्वा गणेश जी को अर्पित करें. दूर्वा गणेश जी के मस्तक पर अर्पित करना चाहिए.

चढ़ाई गई दूर्वा का क्या करें

गणपति पर चढ़ाई गई दूर्वा को इधर उधर नहीं फेका जाता है क्योंकि पूजा के बाद यह दूर्वा ज्यादा पवित्र हो जाता है इसलिए इसे कूड़े में फेंकने के बजाय इसे किसी गमले में उगाया जा सकता है। गणपति पर चढ़ाई गई दूर्वा को आप सूखने के बाद किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर सकती हैं या फिर इसे किसी पेड़ के पास रख सकती हैं।

इसके साथ ही आप इस घास को किसी गमले की मिट्टी में दबा सकती हैं। इस तरह की दूर्वा घास को कभी भी ऐसे स्थान पर नहीं फेंकना चाहिए जहां किसी का पैर लगता हो।