सूर्य पुत्र शनि देव महाराज को न्याय का देवता कहा जाता है.शनि का नाम सुनते ही हर कोई डरने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनि कभी किसी को डराते नहीं हैं बल्कि ये लोगों को उनके कर्मों का ही फल देते हैं यानी जो लोग अच्छे कर्म करते हैं उन्हें शनि देव अच्छे फल देते हैं और जो बुरे कर्म करते हैं उन्हें सजा देते हैं। माना जाता है लोगों को उनके कर्म के अनुसार फल प्रदान करने वाले देवता है शनि देव। इसिलिए शनिवार का दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनिदेव की पूजा के लिए समर्पित है. . ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक ऐसे ग्रह हैं, जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जरूर आते हैं. वह साढ़ेसाती और ढैय्या के रूप में आकर लोगों को उनके फल देते हैं. पहले जान लेते है इनके परिवार में कौन कौन है।
शनिदेव का जन्म
एक कथा के अनुसार, शनिदेव का जन्म हुआ तो वे काले रंग के थे और बहुत कमजोर थे. जब सूर्यदेव को पता चला कि वे पिता बने हैं, तो वे मिलने के लिए पहुंचे. सूर्यदेव ने जब शनिदेव को देखा तो खुश नहीं हुए. उनके मन में यह शंका उठी कि जब उनका रंग गोरा है तो उनका पुत्र काला कैसे हो गया? इस वजह से वे शनिदेव की माता छाया के चरित्र पर शक करने लगे. इसे छाया काफी दुखी हुईं और सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया. कहा जाता है जब शनिदेव माता छाया के गर्भ में थे, तक माता छाया ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. इस वजह से वह कमजोर और काली पड़ गई थीं. उसका प्रभाव शनिदेव पर भी पड़ा, जिससे उनका रंग काला हो गया.

शनिदेव के माता, पिता, भाई और बहन कौन हैं?
शनिदेव की माता का नाम छाया और पिता ग्रहों के राजा सूर्य देव हैं. शनिदेव की बहन का नाम भद्रा है. शनिदेव के सौतेले भाई यमराज और सौतेली बहन यमुना हैं. इनको यम और यमी के नाम से भी जानते हैं.
शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहते हैं?
शनिदेव को क्यों कहा जाता है न्याय का देवता, जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे अपने पिता पर क्रोधित हो गए. उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या कि ताकि वे अपने पिता को माता के प्रति गलत व्यवहार के लिए दंडित कर सकें.
भगवान शिव शनिदेव के तपस्या से प्रसन्न हुए तो उन्होंने शनिदेव को नक्षत्र मंडल में स्थान देकर दंडाधिकारी बना दिया. सूर्य देव के इस व्यवहार के कारण ही पिता और पुत्र में नहीं बनती है. शनिदेव और सूर्य देव में 36 का आंकड़ा है.
मनुष्य के हर काम पर शनि देव की नजर
मनुष्य अपने जीवन जो भी कार्य करता है उन सभी कार्यों पर शनि
देव की नजर रहती है. इसीलिए शनि देव को कर्म का देवता कहते है,
अच्छे कर्म करने वालों को शुभ फल की प्राप्ति होती है वहीं बुरे कर्म करने वालों को शनि दोष का सामना करना पड़ता है.

इन आदतों से शनिदेव नही करते परेशान
हनुमान जी की पूजा करें
शनिदेव हनुमान जी के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते। इसलिए, शनि जयंती पर हनुमान जी की पूजा करना भी लाभकारी होता है।
दान-धर्म का कार्य करें
जो लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. दान-धर्म के कार्य करते हैं. शनिदेव ऐसे लोगों पर हमेशा अपनी कृपा की बरसात करते है।
इसके साथ काले चने, काले तिल, उड़द की दाल, तेल, कपड़े या खाने की सामग्री दान करने वालों से शनि बहुत प्रसन्न रहते हैं.
कुत्तों की सेवा करें
शनि देव कुत्तों की सेवा करने वालों पर हमेशा मेहरबान रहते हैं. खासतौर से काले कुत्ते को रोटी या दूध देने से शनि देव बहुत प्रसन्न होते है, जो लोग नियमित रूप से कुत्तों की सेवा करते हैं, उन्हें आर्थिक मोर्चे पर शनि कभी कंगाल नहीं होने देते हैं.
कहते हैं कि कुत्तों को सरसों के तेल में रोटी भिगो कर खिलाने से राहु केतु से भी मुक्ति पाई जा सकती है।
शनिवार को उपवास रखें
जो लोग शनिवार को शनि देव का उपवास करते हैं और दान धर्म के कार्य करते हैं, उन पर शनि हमेशा मेहरबान रहते हैं. शनिवार को व्रत रखकर अपने हिस्से का भोजन जरूरतमंदों में बांटने वालों से शनि बहुत प्रसन्न रहते हैं. ऐसे लोगों के घर में अन्न के भंडार कभी खत्म नहीं होते हैं.
पीपल के पेड़ की पूजा
जो लोग पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं या इस दिन पौधा लगाते हैं उन पर भी शनि की कृपा हमेशा बनी रहती है.
ऐसा माना जाता हैं कि हर शनिवार बरगद के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से शनि से संबंधित बाधाएं दूर होती हैं. ये उपाय करने वालों के जीवन में शनि कभी अंधेरा नही होता है।
पितरों का श्राद्ध
जो लोग समय पर पितरों का श्राद्ध करते हैं, शनिदेव उनसे भी बहुत प्रसन्न होते है और उनके सारे कष्ट दूर कर देते हैं.
पितृपक्ष में शनिवार और अमावस्या के दिन शनि की पूजा बड़ी फलदायी मानी जाती है.
जब शनिवार को अमावस्या आती है तो शनि देव को तेल चढ़ाएं. पीपल की पूजा करें और जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करें ऐसा करनें से शनिदेव की कृपा दृष्टि बनी रहती है।
जो नियमित नाखून काटते हैं
जो लोग नियमित रूप से अपने नाखून काटते हैं और उन्हें साफ रखते हैं ऐसे लोगों पर शनि की बुरी नजर नहीं पड़ती। शराब का सेवन न करने वाले लोगों पर शनि की खूब कृपा बरसती है।
दूसरों की भलाई सोचने वाले को परेशान नहीं करतें
शास्त्रों में बताया गया है कि जो लोग दूसरों के प्रति बुरी सोच न रखकर उनकी भलाई के बारे में सोचते हैं और कभी झूठ नहीं बोलते हैं, उनसे शनिदेव हमेशा खुश रहते हैं।
जीवन में नेक काम करने वालों से शनि हमेशा खुश रहते हैं।
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