चंडीगढ़, 19 जुलाई: हिमाचल प्रदेश इन दिनों प्रकृति के क्रोध का गंभीर रूप देख रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से बर्फ की चादर बिछ चुकी है, तो वहीं निचले इलाकों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश और लैंडस्लाइड ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। यह हालात न केवल आवाजाही को बाधित कर रहे हैं, बल्कि जानमाल का बड़ा नुकसान भी हो चुका है।

खासकर लाहौल-स्पीति जिले में जुलाई के महीने में ही तीसरी बार बर्फबारी देखी गई है, जिससे शिंकुला, बारालाचा और तंगलंगला जैसे दर्रों पर ताजा बर्फ जमी हुई है। इन ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने गर्मी के मौसम में भी सर्द हवाओं का एहसास करा दिया है।

राज्य भर में सड़कें बंद, यातायात व्यवस्था चरमराई

प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही बारिश से हालात और भी खराब होते जा रहे हैं। शिमला, मंडी, सिरमौर, कांगड़ा, कुल्लू और सोलन जैसे प्रमुख जिलों में सड़कों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। लैंडस्लाइड और पानी के तेज बहाव के कारण करीब 250 से अधिक सड़कें बंद पड़ी हैं।

  • सिर्फ मंडी जिले में 182 सड़कें बाधित हैं।

  • सिरमौर में 26, कुल्लू में 23, कांगड़ा में 10, सोलन में 6, ऊना में 3 और चंबा में 2 सड़कें बंद होने की पुष्टि की गई है।

इन बंद सड़कों के कारण आम जनता को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज के इलाकों में जरूरी सेवाएं जैसे एम्बुलेंस, खाद्य आपूर्ति और राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा आ रही है।

जल जीवन मिशन को भी बड़ा झटका

लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से राज्य की पेयजल परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। 137 पेयजल योजनाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं, जिससे हजारों परिवारों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

  • मंडी में 113

  • कांगड़ा में 18 पेयजल योजनाएं पूरी तरह बाधित हैं।

इन हालातों में ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों या वैकल्पिक माध्यमों पर निर्भर हो गए हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खतरे का संकेत है।

मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट: 21 से 23 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। आगामी 21, 22 और 23 जुलाई को कांगड़ा, शिमला, सोलन, मंडी और सिरमौर जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इस दौरान नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण अचानक बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।

हालांकि, 19 और 20 जुलाई को मौसम थोड़ा सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन कुछ स्थानों पर हल्की फुहारें पड़ सकती हैं।

अब तक 112 लोगों की जान जा चुकी है

राज्य में मानसून की शुरुआत यानी 20 जून से लेकर अब तक 112 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से:

  • 67 लोग प्राकृतिक आपदाओं जैसे बारिश, लैंडस्लाइड और बर्फबारी के चलते जान गंवा चुके हैं।

  • 45 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जिनका कारण अक्सर खराब मौसम, फिसलन भरी सड़कें और दृश्यता की कमी रही है।

अब तक का कुल नुकसान 1221 करोड़ रुपये से अधिक

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, हिमाचल को इस भीषण मौसम ने 1221 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। विभागवार नुकसान का विवरण इस प्रकार है:

  • लोक निर्माण विभाग: लगभग 546 करोड़ रुपये की क्षति

  • जलशक्ति विभाग: लगभग 434 करोड़ रुपये का नुकसान

  • कृषि और बागवानी: कुल मिलाकर 40 करोड़ से अधिक की क्षति

यह नुकसान न केवल राज्य के बजट पर भारी पड़ेगा, बल्कि आगामी समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण को भी चुनौती देगा।

प्रशासन की अपील: सतर्क रहें, यात्रा से बचें

प्रशासन ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस कठिन समय में सतर्कता बरतें और जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें। विशेष रूप से उन लोगों को, जो पहाड़ी इलाकों या नदी-नालों के पास रहते हैं, अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

साथ ही, प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और आपातकालीन स्थिति में सरकारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

 

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