हरियाणा सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले यौ/न अपराधों को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का यौ/न शो/षण, उत्पीड़न और अश्लील सामग्री के लिए उनका इस्तेमाल करना कानूनन गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 के तहत बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कठोर सजा दी जा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में कम से कम 20 साल की कैद से लेकर मृ/त्यु/दंड तक का प्रावधान है। ऐसे अपराधों की जानकारी छिपाना या पुलिस को सूचना नहीं देना भी कानून के तहत दंडनीय है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पीड़ित बच्चों को मुफ्त चिकित्सा, काउंसलिंग और जरूरी संस्थागत सहायता उपलब्ध कराता है। साथ ही, बच्चे की पहचान को गोपनीय रखा जाता है, ताकि उसकी निजता और सुरक्षा बनी रहे।
सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी बच्चे के साथ यौ/न अपराध होने की जानकारी मिलती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। शिकायत के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन नंबर 112, स्थानीय पुलिस, बाल कल्याण समिति या जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए विभाग की वेबसाइट wcdhry.gov.in पर जा सकते हैं।


