दिपावली के त्योहार से लेकर छठ तक मिठाईयों की बड़ी धूम रहती है सभी अच्छे और वैरायटी वाले मिठाईयों को खरीदते है।
नये और कलरफुल मिठाईयो की तो बाजारों मे भरमार लगी रहती है। भारत के हर त्योहार में मिठाईयों की परंपरा शुरु से रही है।
मिठाईयां केवल व्यंजन नहीं, बल्कि परंपरा और संस्कृति का अहम हिस्सा हैं।
उत्सवों, त्योहारों, शादियों, और खास अवसरों पर भारतीय मिठाईयों का विशेष स्थान होता है।
लेकिन इनके स्वास्थ्य पर प्रभाव को अक्सर लेकर चिंता होती है, खासकर मधुमेह और मोटापे के मामलों में।
भारतीय मिठाइयाँ स्वाद में जितनी लाजवाब होती है उतनी ही नुकसान भी करती है ।ज्यादा मात्रा में या बार बार खाने पर उतनी ही हा/निका/रक भी हो सकती है।
इनसे क्या क्या नु/कसा/न हो सकते है जानते है-
डायबिटीज़ का खतरा – ज्यादा मिठाई खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज़ का ख/तरा हो सकता है।
वजन बढ़ना- मिठाईयों में शक्कर और घी भारी मात्रा में होता है, जिससे शरीर में ज्यादा कैलोरी जमा हो जाती है और मोटापा बढ़ने का ख/त/रा बढ़ जाता है।
दांतो में दर्द – मिठाईयों से हमारें दांत सबसे ज्यादा प्रभावित होते है जिससे दांतो में कीड़े, कैविटी और मसूड़ो की बीमारी पैदा हो जाती है।
दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ जाता – मिठाई मे इस्तेमाल होने वाला ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल बढा देता है. जिससे हृदय रोगों के बढ़ने का ख/त/रा रहता है।
इम्यूनिटी पर असर- ज्यादा मिठाई से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
थकान और चिड़चिड़ापन की समस्या- मीठा खाने से तुरंत एनर्जी तो मिलती है लेकिन बाद में थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।
इनसे बचने के सुझाव-
मिठाई संतुलित मात्रा में और स्वस्थ विकल्पों के साथ सेवन किया जा सकता है।
कम शुगर वाली या प्राकृतिक मीठास वाले विकल्प चुने।
घर के बने मिठाई में सामग्री पर नियंत्रण होता है।
इसके साथ ही खुद पर नियंत्रण रखें
स्वाद के साथ सेहत का भी ज्यादा से ज्यादा ख्याल रखें।