इबोला एक ऐसी बीमारी है कि जिसका कोई इलाज नही है। इबोला दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है, जिसमें संक्रमित होने वाले लगभग आधे लोगों की मृत्यु हो जाती है. इबोला एक खत/रनाक वायरस है जो संक्रमित जानवरों से इंसानों तक फैल जाता  है और फिर एक इंसान से दूसरे इंसान तक फैल जाता  है, इसके लक्षणों में उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, बुखार, गले में खऱाश दिखाई देते  है। इबोला  बुंडिबुग्यो वायरस से फैलता है।

इबोला का काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में फैले मौजूदा  प्रकोप के लिए ज़िम्मेदार बुंडिबुग्यो वायरस के विरुद्ध अभी न तो कोई वैक्सीन उपलब्ध है और न ही प्रभावी उपचार, जिससे हालात पर लगातार गम्भीर चिन्ता बरक़रार है. इबोला एक दुर्लभ वायरल बीमारी है जो गम्भीर और अक्सर जानलेवा संक्रमण के कारण होती है.

इबोला से ज्यादातर महिलाएं ग्रसीत होती

WHO के नए आकड़ों में इस बीमारी से लगभग 53 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान इबोला से संक्रमित हो जाए, तो गर्भस्थ शिशु के जीवित नहीं रहने की सम्भावना रहती है. क्योंकि इस बीमारी में गम्भीर रक्तस्राव की आशंका अधिक होती है जिससे  माँ के लिए भी मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है इस रोग से पीडित की देखभाल  में महिलाओं की संख्या अधिक होती है जिससे उनका रोगियों से निकट सम्पर्क रहता है, इसलिए उनके संक्रमित होने का जोखिम भी अपेक्षाकृत अधिक होता है.

भारत में इबोला वायरस का कोई केस नही

भारत में अभी इबोला वायरस का कोई केस नही है। लेकिन इसके बढ़ते ख/तरे को देखते  हुए देश में अलर्ट है। भारत सरकार ने अंतराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी को और मजबूत कर दिया है। एक्सपर्ट का कहना है किसी भी वायरस का खतरा कम करने के लिए विदेशों से आने वालों की समय पर निगरानी करना जरुरी है,इससे समय रहते संक्रमण की रोकथाम हो सकती है।

इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने मिलकर AIR SUVIDHA 2.0 नाम का नया डिजिटल हेल्थ डिक्लेरेशन पोर्टल लॉन्च किया है. इसके जरिए भारत आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहले से जुटा ली जाएगी ताकि संक्रमण के खतरें को कम किया जा सकें। AIR SUVIDHA 2.0 में रियल टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम है.  इसके जरिए यात्रियों की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य एजेंसी तक पहुंच जाएगी. इस डाटा की मदद से स्वास्थ्य अधिकारी संदिग्ध यात्रियों की पहचान कर सकेंगे. यह जानकारी एयरपोर्ट अधिकारियों, स्वास्थ्य अधिकारियों और संबंधित राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों तक जाएगी।

Related Posts