चंडीगढ़, 19 जून। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरणविद् शीशपाल और अधिवक्ता संजीव चौधरी ने पंचकूला जिले के मुवास, असरेवाली तथा एचएमटी पिंजौर क्षेत्र में हजारों पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला उठाते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सरकार से मांग की।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि मुवास गांव के निकट पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (PLPA), 1900 की धारा-4 के तहत संरक्षित क्षेत्र में मार्च 2025 के दौरान लगभग 2,000 सफेदा पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई थी। 21 मार्च 2025 को संरक्षक वन, अंबाला द्वारा किए गए निरीक्षण में यह पाया गया कि लगभग 4,000 नियोजित पेड़ों में से करीब 2,000 पेड़ काट दिए गए थे। आरोप है कि उस समय संबंधित अधिकारियों को इस बारे में जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद फरवरी-मार्च 2026 में असरेवाली क्षेत्र के संरक्षित वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बहुमूल्य खैर वृक्षों की कटाई का मामला सामने आया। विभागीय जांच में 1,138 खैर वृक्षों की अवैध कटाई की पुष्टि हुई। वहीं मार्च 2026 में पिंजौर स्थित एचएमटी परिसर में भी 1,456 खैर वृक्षों की कटाई का मामला उजागर हुआ। इन तीनों मामलों में कुल 4,594 पेड़ों की कटाई रिपोर्ट होने का दावा किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधान मुख्य वन संरक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अभी तक उनके पदभार से वंचित रखा गया है, तब निलंबित अधिकारियों की इतनी शीघ्र पुनर्नियुक्ति किस आधार पर की गई। उन्होंने इसे चयनात्मक कार्रवाई बताते हुए कहा कि इससे गलत संदेश जाता है और जांच की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।


