चंडीगढ़, 8 जुलाई: हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज चंडीगढ़ में आयोजित एक भव्य समारोह में आचार्य भिक्षु स्वामी जी की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आज की पीढ़ी के लिए पथप्रदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु स्वामी जी केवल एक संत नहीं थे, बल्कि उन्होंने धार्मिक और सामाजिक सुधार की क्रांति की नींव रखी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की धरती संतों और ऋषियों की तपस्थली रही है। आज भी जब हम भौतिकवाद की ओर तेजी से भाग रहे हैं, ऐसे समय में संतों की शिक्षाएं ही हमें जीवन की सच्ची दिशा दिखा सकती हैं। उन्होंने तेरापंथ समाज के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे इतने महान संत की जयंती पर श्रद्धालुओं के बीच उपस्थित हो सके।

अहिंसा और अनेकांतवाद – आज की जरूरत

मुख्यमंत्री सैनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य भिक्षु स्वामी जी के जीवन में ‘अहिंसा’ केवल बाह्य हिंसा से दूरी बनाए रखने का विचार नहीं था, बल्कि मन, वचन और कर्म से पूर्ण पवित्रता बनाए रखना भी अहिंसा का ही हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में असहिष्णुता, तनाव और वैचारिक टकराव बढ़ते जा रहे हैं, तब आचार्य भिक्षु जी का ‘अनेकांतवाद’ हमें सहनशीलता और दृष्टिकोणों के सम्मान की ओर ले जाता है।

“हमारे समाज को यदि आगे बढ़ना है तो केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक आधार पर भी मजबूत होना होगा।”

भिक्षु स्वामी जी: धर्म-सुधार के अग्रदूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य भिक्षु स्वामी जी का जीवन तप, त्याग और सत्य की साधना से भरा था। विक्रम संवत 1783 में राजस्थान के कंटालिया गांव में जन्मे भीखणजी ने जीवनभर सामाजिक और धार्मिक सुधार का बीड़ा उठाया। उन्होंने विक्रम संवत 1817 में ‘तेरापंथ’ की स्थापना की, जो धर्म के अनुशासित, तर्कसंगत और शुद्ध स्वरूप को समर्पित आंदोलन था।

‘एक आचार्य, एक विधान और एक विचार’ – इस मंत्र को आधार बनाकर उन्होंने अनुशासन और निष्ठा का नया आदर्श खड़ा किया।

युवाओं को आत्मानुशासन और चरित्र निर्माण की सीख

श्री सैनी ने युवाओं से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि वे आचार्य भिक्षु स्वामी जी के जीवन को पढ़ें, समझें और उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब एक व्यक्ति सुधरता है, तो धीरे-धीरे पूरा समाज और फिर राष्ट्र में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है।

“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह सपना तब ही साकार होगा जब हम चरित्रवान और नैतिक समाज की नींव मजबूत करेंगे।”

संतों की शिक्षाएं बोलने से नहीं, अपनाने से बदलता है समाज

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य मुनिश्रीजनों – मुनिश्री विनय कुमार आलोक, मुनिश्री सुधाकर जी, मुनिश्री अभय कुमार आलोक व अन्य संतों ने आचार्य भिक्षु जी के जीवन, तपस्या और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षाएं सिर्फ बोलने भर के लिए नहीं हैं, उन्हें जीवन में अपनाना ही असली श्रद्धांजलि है।

तेरापंथ: अनुशासन और गुरु-भक्ति का प्रतीक

समारोह के दौरान तेरापंथ समाज की विशिष्टताओं का भी उल्लेख किया गया। विशेष रूप से ‘एक गुरु, एक विधान’ की परंपरा पर जोर दिया गया, जिसमें अनुयायी अपने गुरु के आदेश को सर्वोच्च मानते हैं और सम्पूर्ण समाज में एकता और अनुशासन की भावना बनी रहती है।

 

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