छठ पर्व भक्ति, संयम और पवित्रता का महापर्व है।
छठ पर्व के तीसरे दिन अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
साथ ही छठ के आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। 27 नवंबर को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा
जबकि 28 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ पर्व के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व होता है।
इस दौरान व्रती पानी में खड़े रहकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं
जानते हैं इस साल छठ पर्व में अर्घ्य देने का समय क्या रहेगा।
आज छठ पर्व का तीसरा दिन है और इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है ।
इस अर्घ्य को देने के लिए व्रतधारी सूर्यास्त से पहले किसी नदी या घाट पर पहुंचते हैं। पूजा के लिए घाट वो पहले से ही तय कर लेते है।
घाट पर पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है ।
इस पूजा के लिए बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना, धूप, अगरबत्ती, हल्दी और कई अन्य प्रकार की सामग्री रखी जाती है।
संध्या अर्घ्य के देने के बाद व्रती उषा अर्घ्य की तैयारी करते हैं। छठ पर्व में सूर्योदय के समय अर्पित किए जाने वाले अर्घ्य को उषा अर्घ्य कहा जाता है।
छठ पर्व का संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का समय
छठ पूजा संध्या अर्घ्य समय 27 अक्टूबर 2025 की शाम 5 बजकर 10 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहने वाला है।
छठ पूजा उषा अर्घ्य समय
छठ पूजा उषा अर्घ्य समय 28 अक्टूबर 2025 की सुबह 6 बजे से 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
सूर्य देव को अर्ध्य देते समय मंत्र का जाप
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ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
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ॐ घृणि सूर्याय नमः
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ॐ सूर्याय नमः

छठ पूजा संध्या अर्घ्य विधि –
संध्या अर्घ्य के लिए व्रती साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूरे परिवार के साथ घाट या जलाशय पर जाते हैं।
एक बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना, दीया और अन्य प्रसाद रखा जाता है।
सूर्य देव के अस्त होने से पहले व्रती पवित्र जल में कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
अर्घ्य देते के लिए एक लोटे में जल भरकर उसमें कच्चे दूध की कुछ बूंदे, लाल चंदन, फूल, अक्षतऔर कुश डालकर तैयार किया जाता है।
साथ ही अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप किया जाता है और छठ गीत गाए जाते हैं।
अर्घ्य के बाद व्रती सूर्य व छठी मइया से सुख-समृद्धि, संतान सुख और स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। छठ पर्व की यह संध्या पूजा बहुत खास मानी जाती है.
इस दिन व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और जीवन में खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं.
पूजा का विधान बेहद शुद्धता और सादगी से किया जाता है. महिलाएं स्नान करके नए वस्त्र धारण करती हैं,
और फिर डूबते सूर्य की आराधना के लिए घाट या तालाब पर जाती हैं. घाट पर पहुंचकर व्रती महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाती
जिसमें ठेकुआ, गुड़ की खीर, चावल, फल और गन्ना शामिल होता है. यह प्रसाद बांस की सूप में सजाया जाता है.
सूर्य देव की आराधना के समय महिलाएं जल में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं. उस दौरान उनके साथ पूरा परिवार भी शामिल होता है और सभी मिलकर छठी मैय्या के गीत गाते हैं
ये हैं सूर्य देव को अर्घ्य देने के नियम
सूर्य को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले जल में लाल चंदन, सिंदूर और लाल फूल मिलाएं.
अर्घ्य देते समय सूर्य की किरणों पर ध्यान दें कि वे हल्की हों, बहुत तेज न हों.
अर्घ्य देते समय ‘ओम सूर्याय नमः’ मंत्र का 11 बार जप करें. इसके बाद, सूरज की ओर मुंह करते हुए 3 बार परिक्रमा करें।
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