पंचकूला , 1 अप्रैल :  राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सांसद रेखा शर्मा ने केयर इकोनॉमी और उसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखी रह जाने वाली भूमिका का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिलाओं द्वारा किया जाने वाला देखभाल संबंधी कार्य देश की सामाजिक संरचना की मजबूत नींव है, जिसे उचित सम्मान और पहचान मिलना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत आज वुमेन-लेड डेवलपमेंट की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और केंद्र सरकार द्वारा मिशन शक्ति , पोषण 2.0 तथा सक्षम आंगनवाड़ी जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए एक मजबूत सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया गया है। इसके बावजूद केयर गिविंग से जुड़े कार्यों को आज भी समाज में महिलाओं का स्वाभाविक दायित्व माना जाता है, न कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक योगदान के रूप में।

श्रीमती शर्मा ने आर्थिक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की महिलाएँ आज भी दोहरी जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं, जहाँ वे एक ओर परिवार की देखभाल करती हैं और दूसरी ओर कार्यक्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता तथा लाखों महिलाएँ निःशब्द रूप से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं, लेकिन उनके योगदान को समाज में अपेक्षित सम्मान अभी भी पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाया है।

उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को और अधिक मजबूत करना है तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, तो परिवारों में देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों को साझा करने की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही, केयर वर्क को एक गरिमापूर्ण और मूल्यवान कार्य के रूप में स्वीकार करना तथा आंगनवाड़ी और चाइल्डकेयर प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करना भी समय की आवश्यकता है।

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