चंडीगढ़, 4 जुलाई: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। पार्टी के अंदरूनी हलकों से जो संकेत सामने आ रहे हैं, उनसे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि बीजेपी अब एक नए अध्यक्ष की घोषणा की तैयारी में है। इस बार पार्टी की बागडोर किसी महिला नेता को सौंपने की चर्चा जोरों पर है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम होगा। अगर ऐसा होता है, तो यह पार्टी के भीतर महिलाओं के नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त, नेतृत्व परिवर्तन की बारी
वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का आधिकारिक कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन 2024 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया था। अब जबकि आम चुनाव हो चुके हैं और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार एक बार फिर केंद्र की सत्ता में लौट चुकी है, संगठनात्मक ढांचे में नए सिरे से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार नेतृत्व परिवर्तन को लेकर विशेष रणनीति अपनाई जा रही है। इस रणनीति के केंद्र में महिला सशक्तिकरण और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण का मुद्दा है। पार्टी का मानना है कि अगर इस बार किसी योग्य और अनुभवी महिला नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह कदम देशभर की महिलाओं के बीच एक प्रेरक संदेश देगा और बीजेपी की जनाधार को और मजबूत करेगा।
महिला अध्यक्ष की ओर निर्णायक क़दम
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच यह राय बनती दिखाई दे रही है कि इस बार महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इस दिशा में विचार-विमर्श तेज हो गया है और संभावित चेहरों की सूची भी तैयार की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है, जो बीजेपी के सभी बड़े फैसलों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
RSS का मानना है कि महिला नेतृत्व से न केवल पार्टी का सामाजिक संदेश सशक्त होगा, बल्कि महिला मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ और मजबूत होगी। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कई राज्यों में महिला वोटर्स निर्णायक भूमिका में रहीं, और इस वर्ग को साधना अब पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अध्यक्ष पद की रेस में ये नाम सबसे आगे
1. निर्मला सीतारमण – अनुभव और रणनीति की धुरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस रेस का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वे न केवल देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री रही हैं, बल्कि इससे पहले वे रक्षा मंत्रालय जैसे अहम पद पर भी रह चुकी हैं। संगठन में उनकी पैठ मजबूत मानी जाती है और हाल ही में उन्होंने बीजेपी मुख्यालय में जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ एक अहम बैठक भी की थी। दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी उनका नाम उपयुक्त माना जा रहा है।
2. डी. पुरंदेश्वरी – बहुभाषी नेता, संगठन में गहरी पकड़
पूर्व केंद्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। वे एक अनुभवी और बहुभाषी नेता हैं, जिन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों और मंत्रालयों में काम करने का गहरा अनुभव है। हाल ही में वे एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल “ऑपरेशन सिंदूर” का हिस्सा भी रही हैं। संगठनात्मक दक्षता और व्यापक जनसंपर्क के कारण उनका नाम भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
3. डॉ. वानती श्रीनिवासन – महिला मोर्चा से लेकर मुख्यधारा तक
तमिलनाडु की कोयंबटूर साउथ से विधायक डॉ. वानती श्रीनिवासन ने भी संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। 2020 में वे भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं और 2022 में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य भी बनीं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है – खासकर तमिलनाडु जैसे राज्य की पहली महिला के रूप में। उनकी नेतृत्व क्षमता और जमीनी कार्य के कारण वे भी एक सशक्त उम्मीदवार के रूप में उभर रही हैं।


