राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व और मुख्य वक्ता राजकीय योग कॉलेज सेक्टर-23 से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित वासदेव ने दीप प्रज्वलन के साथ व्याख्यान का विधिवत रूप से शुभारंभ किया।
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा एवं डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में समग्र कल्याण के लिए योग विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित वासदेव द्वारा योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि योग और आयुर्वेद का गहरा संबंध है। आयुर्वेद शरीरिक रोगों में कारगर है तो योग के जरिये व्यक्ति शारीरिक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में औषधियों के जरिये व्यक्ति का उपचार होता है, लेकिन योग विधा के जरिये व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जीवन शैली बेहतर होती है।
मुख्य वक्ता डॉ. मोहित वासदेव ने कहा कि आयुर्वेद और योग दोनों एक सिक्के के पहलू हैं, जोकि मानव जीवन को स्वस्थ संतुलित और रोग मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भागदौड़, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसे असंक्रामक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में नियमित योगाभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मानसिक तनाव को भी कम कर सकता है। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके सवालों का जवाब दिया।


