गुजरात के कच्छ स्थित बानी घासभूमि में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 20 ब्लैकबक को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गुजरात वन विभाग ने वंतारा के तकनीकी सहयोग से यह पहल की। इस दौरान 5 नर और 15 मादा ब्लैकबक को बानी के प्राकृतिक क्षेत्र में पुनर्वासित किया गया।

इन ब्लैकबक को जामनगर स्थित वंतारा से लाया गया था। स्थानांतरण से पहले सभी जानवरों की स्वास्थ्य जांच, क्वारंटीन और बीमारी की निगरानी की गई। इसके बाद उन्हें विशेष व्यवस्था के तहत सुरक्षित तरीके से बानी पहुंचाया गया। वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।

अधिकारियों के अनुसार, यह पहल केवल 20 ब्लैकबक को जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बानी घासभूमि में स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करना है। ब्लैकबक इस क्षेत्र की पारंपरिक वन्यजीव आबादी का हिस्सा रहे हैं। इनके साथ चिंकारा, नीलगाय और जंगली सूअर जैसी प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं।

गुजरात में देशी शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक व्यापक कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य में 500 ब्लैकबक और 100 चिंकारा के स्थानांतरण को मंजूरी दी है। इस योजना का एक उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करना और घासभूमि के पारिस्थितिक संतुलन को बेहतर बनाना है।

गुजरात वन विभाग ने कहा कि बानी जैसे महत्वपूर्ण घासभूमि क्षेत्रों में वन्यजीवों की वापसी से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से इन प्रयासों को लंबे समय तक सफल बनाने पर जोर दिया जाएगा।

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