अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के संघर्ष विराम को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि लेबनान में इजरायल ने ‘कयामत’ बरसा दी है। बुधवार को इजरायली हमलों ने लेबनान को दहला दिया, लेबनान में इजराइल के हमलों से एक ही दिन में 254 लोगों की मौत हुई है, जबकि 1165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके बाद देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

संघर्ष विराम समझौते से पीछे हट सकता है ईरान?

ईरान की न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि यदि इजरायल ने लेबनान पर हमले नहीं थामें, तो वो मौजूदा संघर्ष विराम समझौते से पीछे हट जा सकता है क्योंकि सीजफायर और हमलें एक साथ नही किए जाते है…इसके साथ ही ईरान ने कहा है कि संबंधित समुद्री रास्तों से गुजरने वाले हर जहाज को अब तेहरान से अनुमती लेना पडेगा. वही अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना अमेरिका के जहाज और हथियार ईरान के आसपास तैनात रहेगें।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह सीजफायर लागू करता है या इजराइल के जरिए जंग जारी रखता है, क्योंकि दोनों साथ नहीं चल सकते।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि लेबनान  सीजफायर के इस समझौते में शामिल नहीं है।अब इन हमलें को देखते हुए सीजफायर सफल होगा या नही यह देखना होगा। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित सीजफायर समझौते को लेकर भ्रम बना हुआ है। ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कह दिया है कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नही है।

ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने अमेरिका और ईरान के सीजफायर को लेबनान तक लागू करने की मांग की। इजरायल ने दावा किया कि उसने हिजबुल्लाह पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है वही लेबनान में घायलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि एम्बुलेंस कम पड़ गईं और लोग मोटरसाइकिलों पर घायलों को अस्पताल पहुंचाते दिखे।

हिजबुल्लाह का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि वे सीजफायर का हिस्सा हैं, इसलिए उन्होंने बुधवार सुबह हमले रोक दिए थे, लेकिन इजरायल ने हमले जारी रखते हुए समझौता तोड़ दिया।

 

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