आज चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि है और आज पूरा देश हनुमान जयंती मना रहा है. माना जाता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जी का जन्म हुआ था. आज भक्त विशेष रुप से बजरंगबली के दर्शन और पूजन कर रहे हैं. भक्त सुबह से ही हनुमान जी की पूजा करने में जुटे हुए है ।कहते है अगर अभी कोई देवता इस पृथ्वी पर मौजूद है तो वो हनुमान जी है। वो हर समय अपने भक्तों के साथ जुड़े रहते है। हनुमान जी की पूजा ज्यादातर भक्त सुबह के समय ही कर लेते है लेकिन सुबह टाइम न मिल पाने की वजह से कई भक्त शाम के समय पूजा करते है ।
पूजा के लिए शाम का मुर्हूत
इस वर्ष हनुमान जयंती पर पूजा के लिए दो प्रमुख मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं. सुबह का शुभ समय 6:10 बजे से 7:44 बजे तक रहा
जबकि शाम का मुहूर्त 6:39 बजे से रात 8:06 बजे तक है. यदि सुबह पूजा नहीं हो पाई है, तो शाम के इस समय में श्रद्धा से की गई आराधना भी पूर्ण फल देती है

संकटमोचन यानी कष्टों को हरने वाला. मान्यता है कि संकटमोचन का नाम भर लेने से भय और परेशानियां दूर हो जाती हैं, लेकिन आप जानते हैं कि बजरंगबली सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि देवताओं के भी संकटमोचन हैं. उन्होंने देवताओं को भी समस्याओं से निकाला था.
हनुमान जी के अनेक नाम है कोई बजरंगबली कहता है, कोई केसरी नंदन. कोई रामदूत कहकर बुलाता है, तो कोई महावीर, लेकिन परेशानियों में पड़े हर इसांन के लिए भगवान संकटमोचन हैं.
हनुमान जी ने देवताओं को भी समस्याओं से निकाला था
प्रभु हनुमान जी ने श्री राम का काम करवाया था जब श्री राम लंका पर चढ़ाई कर रहें थे। युद्ध के दौरान उन्होने पूरी लंका जला दी थी और भगवान श्री राम के साथ माता सीता को रावण के चंगुल से बचा कर लाए थे।
प्रभु हनुमान ने लक्ष्मण जी के प्राण बचाएं थे।रावण के पुत्र मेघनाद के बाणों से भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी मुर्छित हो गये थे तब उनके प्राण बचाने हनुमान जी ही आएं थे और उनके उपचार केे लिए संजीवनी बूटी का पूरा पर्वत उठा लाए थे ।
प्रभु हनुमान ने सुग्रीव जी को सम्मान दिया था जब बाली के कारण सुग्रीव अपना राजपाठ छोड़ दिए थे और वन में रहने चले गए थे। इसके साथ ही हनुमान जी ने सुग्रीव को प्रभु श्री राम से मिलाया था।


