जीरकपुर-पंचकूला बाइपास परियोजना के लिए  पुराने हजारों पेड़ काटने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, हरियाणा व पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मागा  है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह हाईवे पंजाब से शुरू होकर हरियाणा होते हुए गुजरेगा, जिसके चलते करीब सात हजार पेड़ों की कटाई का खतरा है। इनमें से कई पेड़ 100 वर्ष से अधिक पुराने बताए गए हैं।

तीन हजार पेड़ों की कटाई  की आशंका

सुनवाई के दौरान यह भी दलील दी गई कि पंचकूला के एक विकसित गोल्फ कोर्स क्षेत्र में लगभग 14 हजार पेड़ मौजूद है, जहां से हाईवे गुजरने की योजना है। इस कारण गोल्फ कोर्स के चार होल, प्रभावित होंगे और करीब तीन हजार पेड़ों की कटाई  की आशंका है। इसके अलावा पंचकूला के सेक्टर-1ए की ग्रीन बेल्ट, जहां वन्यजीवों की मौजूदगी बताई गई, वहां भी लगभग दो हजार पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई।

इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष अपने  विचारों को रखते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट एक बड़े वन क्षेत्र और हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाएगा, उसने गूगल मैप्स और तस्वीरों के जरिये प्रस्तावित मार्ग को भी दिखाया और कहा मात्र 500 मीटर के डायवर्जन से इसे टाला जा सकता है। याचिका में कहा गया कि पहले से मौजूद नेशनल हाईवे-7 के जरिए कनेक्टिविटी दी जा सकती है, जिससे हजारों पेड़ों को बचाया जा सकता है।

कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा में वन क्षेत्र पहले ही बहुत कम है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि यदि तुरंत इसे नही रोका गया तो कटाई का काम शुरू हो सकता है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुच सकता है। हाई कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों नेशनल हाईवे अथारिटी, केंद्र सरकार, पंजाब व हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए मामले को 1 अप्रैल के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह पूरा क्षेत्र ट्राइसिटी चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली का “ग्रीन लंग” है, जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने, तापमान संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है। अब पर्य़ावरण को लेकर कोर्ट ने संबधित विभागों को आदेश जारी कर दिया है।

 

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