कश्मीर में तेजी से घटते ग्लेशियर आने वाले समय के लिए चिंता का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले लगभग 60 वर्षों में कश्मीर के करीब 30 प्रतिशत ग्लेशियर खत्म हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। शुरुआत में इससे नदियों में पानी की मात्रा बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में जल स्रोत कमजोर होने का खतरा है। इसका असर खेती, पेयजल, बिजली उत्पादन और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने समय रहते प्रभावी कदम उठाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि यदि ग्लेशियरों को बचाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य में कश्मीर समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।


