गलत एस्टीमेट या बिना अनुमति कॉन्ट्रैक्ट राशि बढ़ाई तो होगी चार्जशीट, अनिवार्य सेवानिवृत्ति– CM सैनी का आदेश!

चंडीगढ़, 11 जुलाई: हरियाणा सरकार ने विकास परियोजनाओं में अनुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी विकास परियोजना में कॉन्ट्रैक्ट राशि में अनधिकृत वृद्धि को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों और कंसल्टेंट्स के खिलाफ चार्जशीट दायर कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जाएगा।

अब गलती की कोई गुंजाइश नहीं

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग से संबंधित कैबिनेट उप-समिति की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया:

  • बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के अनुबंध (contract) में किसी भी प्रकार की वृद्धि अवैध मानी जाएगी।

  • गलत एस्टीमेट तैयार करने वाले अफसर और कंसल्टेंट पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।

  • लापरवाही करने वाले अफसरों को चार्जशीट कर अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जाएगा।

“गुणवत्ता और पारदर्शिता ही प्राथमिकता”

मुख्यमंत्री सैनी ने दो टूक कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए:

  • सभी विकास परियोजनाओं में पूर्ण तकनीकी डिजाइन और संरचनात्मक दस्तावेज निविदा (tender) में शामिल हों।

  • नॉन-शेड्यूल आइटम्स (अनिर्धारित कार्यों) को न्यूनतम रखा जाए, जिससे बजट पारदर्शी और नियंत्रित रहे।

  • किसी भी अतिरिक्त कार्य को शामिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य रूप से प्राप्त की जाए।

“लोगों को वास्तविक लाभ मिले, यही सरकार की प्रतिबद्धता”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य है कि जनता को सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं का समय पर, गुणवत्ता सहित लाभ मिले। इसके लिए:

  • कमीशनिंग से पहले हर परियोजना की समीक्षा अनिवार्य हो।

  • कार्यों की निगरानी प्रणाली सुदृढ़ की जाए।

  • दोषियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करके दूसरों के लिए मिसाल कायम की जाए।

मुख्यमंत्री ने की परियोजनाओं की समीक्षा, अफसरों को दिए निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने चालू विकास परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए अफसरों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि:

  • विभागीय अफसर अपनी जिम्मेदारी समझें और प्रक्रियागत पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

  • निर्माण में विलंब या लागत में अनावश्यक बढ़ोतरी के पीछे की जवाबदेही तय की जाए।

  • डिज़ाइन, डीपीआर, और टेंडरिंग जैसे चरणों में किसी प्रकार की शिथिलता न हो।

बैठक में ये प्रमुख अधिकारी रहे उपस्थित:

  • रणबीर गंगवा, मंत्री (लोक निर्माण विभाग)

  • अनुराग रस्तोगी, मुख्य सचिव

  • अरुण कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव

  • अनुराग अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग

  • विनीत गर्ग, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा

  • टी.एल. सत्यप्रकाश, आयुक्त एवं सचिव, परिवहन

  • यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव

  • अन्य वरिष्ठ अधिकारी