28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमला किया। जिसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों, इमारत और अन्य जगहों पर हमला शुरू किया।
इजरायल और अमेरिका ने ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत ईरान पर किए गए संयुक्त युद्ध का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत ने इजरायल में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है, जिसमें ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतने और ‘हमेशा सतर्क रहने’ की सलाह दी गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्हें भारत वापस लाने के लिए ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि यह युद्ध चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है इससे आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है, खासकर इस युद्द् का असर ग्रामीण और मध्यम वर्ग पर ज्यादा पड़ेगा। उद्योग जगत, एयरलाइंस और आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
तेल की कीमतों पर असर
भारत अपनी 80-85% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इनमें खाड़ी क्षेत्र (सऊदी अरब, इराक, यूएई) से आने वाला हिस्सा बड़ा है। अगर ये युद्ध लंबा खिंचता है तो पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत में वृद्धि हो सकती है।
रुपया और शेयर बाजार
बाजार में बनने वाले ऐसे हालातों में रुपए में कमजोरी और शेयर बाजार में गिरावट जैसी स्थिति भी दिखाई देती है। इसके अलावा शिपिंग कॉस्ट, इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी हो सकता है असर
भारत दवा निर्माण के लिए कच्चे माल का बड़े पैमाने पर आयात करता है। युद्ध लंबा चलने पर दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। यही स्थिति टीवी, फ्रिज और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी है, जिनकी निर्माण लागत आयातित पुर्जे महंगे होने के कारण बढ़ जाएगी।
सोना चांदी पर असर
युद्ध के दौरान अक्सर अनिश्चितताएं बढ़ जाती है और ऐसी स्थिति में निवेशक सोने चांदी जैसी सेफ असेट्स खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। यदि ऐसा हुआ तो सोने चांदी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
रसोई का बजट हो सकता है महंगा
युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ता दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल के सह-उत्पाद प्लास्टिक दाने की कीमतों में महज दो दिनों के भीतर करीब 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्लास्टिक का इस्तेमाल लगभग हर रोजमर्रा की चीज़े जैसे खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, घरेलू सामान और उपभोक्ता उत्पादों में होता है। ऐसे में कीमतों में आई इस तेजी का असर जल्द ही बाजार में मिलने वाली कई वस्तुओं पर पड़ सकता है। इसके साथ ही खाद्य तेलों के बाजार में भी तेजी के संकेत मिलने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले दिनों में रसोई का बजट और महंगा हो सकता है।
यानी वैश्विक हालात का असर अब धीरे-धीरे भारतीय बाजार और आम जनता की जेब पर भी नजर आने लगा है।
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