हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का बहुत ही महत्व है. त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है. हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. सोम प्रदोष व्रत पर त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर को सुबह 4 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 18 नवंबर को सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मार्गशीर्ष का महीना देवताओं का अत्यंत प्रिय महीना होता है ऐसे में सोम प्रदोष व्रत और अधिक फलदायी बन जाता है।
त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत कहा जाता
मान्यता है कि जो लोग इस दिन सच्चे भाव से पूजा-पाठ करते हैं, उनके जीवन में खुशहाली बनी रहती है और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है. यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला माना जाता है. विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है हिंदू पंचांग में त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत कहा जाता है। जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

सोम प्रदोष का अर्थ
सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर इसे सोम प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा अशुभ फल दे रहा हो, उसे सोम प्रदोष जरूर नियमपूर्वक रखना चाहिए. अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं. इस बार यह पावन व्रत 17 नवंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन शिव भक्तों के लिए दो शुभ योग बन रहे हैं, जिससे पूजा का फल और भी बढ़ जाएगा।
सोम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त?
इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। पूजा का शुभ समय शाम 5:27 से रात 8:07 बजे तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।

प्रदोष के नियम और पूजा विधि
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प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें.
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इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई कर पूरे दिन उपवास रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
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इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेलपत्र, धतूरा, चंदन, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें.
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शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.
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