चंडीगढ़, 9 जुलाई: भारत और दुनिया भर की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ा विवाद उस समय खड़ा हो गया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) ने एक चौंकाने वाला दावा किया। X के अनुसार, 3 जुलाई 2025 को भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आईटी एक्ट) की धारा 69A के अंतर्गत कुल 2,355 सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश जारी किया। इस सूची में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अकाउंट्स—@Reuters और @ReutersWorld—भी शामिल थे।
X का बयान: सरकार ने एक घंटे में मांगी कार्रवाई
X के ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स डिवीजन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार ने इन अकाउंट्स को “अगले आदेश तक” के लिए बंद रखने का निर्देश दिया था, और इसके लिए कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। X के मुताबिक, भारत सरकार ने उन्हें सिर्फ एक घंटे के भीतर कार्रवाई करने को कहा और यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसा क्यों किया जा रहा है।
सरकार की सफाई, लेकिन असमंजस कायम
सरकार ने इस पूरे मामले पर जवाब देते हुए कहा कि उसने रॉयटर्स के किसी भी अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश नहीं दिया। हालांकि, रॉयटर्स के भारतीय X अकाउंट पर “लीगल डिमांड के जवाब में ब्लॉक” का संदेश साफ-साफ दिखाई दे रहा था, जिससे इस सरकारी सफाई पर सवाल उठने लगे। यह बात सोशल मीडिया यूज़र्स, पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की नजरों से छिपी नहीं रही।
जनता का गुस्सा: अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला?
जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। #UnblockReuters, #MediaFreedom और #DemocracyUnderThreat जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। आम लोगों के साथ-साथ पत्रकार, एक्टिविस्ट और मीडिया विश्लेषक भी इस घटना को मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बता रहे हैं।
आखिर क्या है आईटी एक्ट की धारा 69A?
आईटी एक्ट की धारा 69A के अंतर्गत केंद्र सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या संप्रभुता के खतरे के आधार पर ब्लॉक कर सकती है। लेकिन इस कानून के अंतर्गत पारदर्शिता और वैध कारण बताना अनिवार्य होता है। इस बार, X का कहना है कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार बनाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स: पुराना लेकिन गंभीर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच इस तरह की टकराहट देखने को मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में कई बार सरकार ने X, Facebook, YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने या अकाउंट्स ब्लॉक करने के लिए निर्देश दिए हैं। लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी का नाम आने से मामला वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की छवि
इस विवाद ने भारत की मीडिया नीति और डिजिटल सेंसरशिप को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें खींच ली हैं। प्रेस स्वतंत्रता, डिजिटल अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर सवाल उठने लगे हैं।
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