पिछले कुछ दिनों से आपने सुना होगा रुपया दिन पर दिन डॉलर के आगे गिर रहा है। अब डॉलर के आगे रुपया और भी गिर गया है, बतादें 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.21 रुपए के लेवल पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक रुपये में गिरावट की रफ्तार इस बार काफी तेज रही. कम समय में रुपया 85 से 90 के स्तर तक गिर गया, जबकि पहले 5 रुपये की गिरावट आने में सालों लग जाते थे. यह गिरावट दूसरी सबसे तेज गिरावट बताई गई है, जो ‘Taper Tantrum’ के बाद देखी गई थी .
लेकिन सवाल यह है कि गिरावट आखिर हुई क्यों? विशेषज्ञों ने इसके तीन बड़े कारण बताए
1-पहला बड़ा कारण है अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता.
2- दूसरा कारण है विदेशी निवेशकों यानी FPI द्वारा भारतीय बाजारों से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना.
3- तीसरा कारण है RBI का यह स्पष्ट रुख कि वह रुपये को किसी खास स्तर पर रोकने के लिए आक्रामक दखल नहीं करेगा.
RBI ने साफ कहा है कि उसका लक्ष्य केवल स्थिरता बनाए रखना है, न कि किसी खास भाव की रक्षा करना.वही शुक्रवार को RBI पॉलिसी आने वाली है मार्केट को इससे उम्मीद है कि सेंट्रल बैंक करेंसी को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाएगा.
टेक्निकल रुप से रुपया बहुत ज्यादा ओवरसोल्ड हो चुका है।
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है।
रुपए में गिरावट से इम्पोर्ट करना अब महंगा होगा
रुपए में गिरावट अब होने से भारत के लिए चीजों का इम्पोर्ट महंगा होना है। इसके अलावा विदेश में घूमना और पढ़ना भी महंगा हो गया है। मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी, तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाता था। अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 90.21 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इससे छात्रों के लिए फीस से लेकर रहना-खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी। लगातार विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपए पर दबाव बनाया है।
रुपया 2025 में अब तक 5.26% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.21 रुपए के लेवल पर पहुंच गया है। इसके साथ ही रुपया कमजोर होने से देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक दबाव का कारण भी है। इससे इंपोर्ट महंगा होता है, पेट्रोल डीजल पर असर पड़ता है, कंपनियों की लागत बढ़ती है और महंगाई ऊपर जाने लगती है.
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