चंडीगढ़, 15 मई: हिंदू धर्म में वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का स्थान सर्वोच्च माना जाता है। इसे ‘भीमसेन एकादशी’ भी कहा जाता है, और यह अपने कठोर नियमों और अत्यधिक पुण्यफल के कारण विशेष महत्व रखती है। इस दिन का व्रत न केवल शारीरिक तपस्या है, बल्कि यह आत्मिक अनुशासन और संयम का भी प्रतीक है।
‘निर्जला’ शब्द का अर्थ है – बिना जल के। यह उपवास अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक न अन्न, न जल, और न ही किसी प्रकार का फलाहार किया जाता है। यह उपवास इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। शास्त्रों में इस व्रत को करने से सालभर की एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:
🔹 गृहस्थों के लिए व्रत तिथि: शुक्रवार, 6 जून 2025
🔹 वैष्णवों के लिए व्रत तिथि: शनिवार, 7 जून 2025
🔸 एकादशी तिथि आरंभ: 6 जून 2025 को सुबह 2:15 बजे
🔸 एकादशी तिथि समाप्त: 7 जून 2025 को सुबह 4:47 बजे
🔸 व्रत पारण का शुभ मुहूर्त (व्रत खोलने का समय): 7 जून 2025, दोपहर 1:57 बजे से शाम 4:36 बजे तक।
व्रत का आध्यात्मिक महत्व:
निर्जला एकादशी केवल भोजन और जल त्यागने का नाम नहीं है, यह दिन शरीर, मन और आत्मा की परीक्षा है। यह दिन व्यक्ति को संसारिक सुखों से ऊपर उठाकर आत्मिक जागृति की ओर ले जाता है। इस दिन व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है।
इस एक दिन के व्रत को करने से वही पुण्य प्राप्त होता है, जो वर्षभर की अन्य सभी 23 एकादशियों के व्रतों से मिल सकता है। जो इस दिन स्वयं पर विजय पा ले, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की ओर अग्रसर होता है।
कैसे करें निर्जला एकादशी का व्रत:
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व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और रात्रि को जल्दी सोएं।
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6 जून को सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
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भगवान विष्णु की पूजा पीले पुष्प, तुलसी, फल और धूप-दीप से करें।
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पूरे दिन जल भी ग्रहण न करें (यदि स्वास्थ्य अनुमति दे)।
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व्रत का पारण अगले दिन 7 जून को दोपहर 1:57 से 4:36 बजे के बीच करें।
धार्मिक मान्यता:
महाभारत के अनुसार भीमसेन ने इसी दिन यह व्रत किया था। उन्हें अन्य एकादशियों के कठिन नियम पालन में कठिनाई होती थी, तब महर्षि व्यास ने उन्हें निर्जला एकादशी करने का सुझाव दिया था, जिससे उन्हें संपूर्ण वर्ष की एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो सका।
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