देश भर में महर्षि वाल्मीकि की जयंती को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
हर साल आश्विम माह की पूर्णिमा तिथि पर वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। ऐसे में आज यानी 7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती मनाई जा रही है।
इस अवसर पर शोभायात्राओं का आयोजन भी होता है।
इस अवसर पर वाल्मीकि मंदिर में पूजा अर्चना भी की जाती है तथा शोभायात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह के लोग इसमें बडे़ उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
झांकियों के आगे उत्साही युवक झूम-झूम कर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
महर्षि वाल्मीकि को याद करते हुए इस अवसर पर उनके जीवन पर आधारित झांकियां निकाली जाती हैं व राम भजन होता है।
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित पावन ग्रंथ रामायण में प्रेम, त्याग, तप व यश की भावनाओं को महत्व दिया गया है।
वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करके हर किसी को सद्मार्ग पर चलने की राह दिखाई।
उनके द्वारा संस्कृत में लिखा गया रामायण महाकाव्य हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है।
वाल्मीकि जी ने भगवान श्रीराम के जीवन, संघर्ष, आदर्श और धर्म की स्थापना की कथा को महाकाव्य रामायण के रूप में लिखा.
आगे चलकर जब माता सीता को वनवास मिला तब वाल्मीकि जी ने ही उन्हें अपने आश्रम में आश्रय दिया था.
उनके दोनों पुत्रों लव और कुश का जन्म भी इसी आश्रम में हुआ और उन्होंने ही वाल्मीकि जी से रामायण का ज्ञान प्राप्त किया.
रामायण में लगभग 24,000 श्लोक हैं. यह संस्कृत के सबसे प्राचीन महाकाव्यों में से एक हैं। उन्हें आदिकवि भी कहा जाता है.
महर्षि वाल्मीकि कौन थे?
रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.
लेकिन उन्होंने बहुच छोटी उम्र में ही घर छोड़कर वैराग्य जीवन अपना लिया था.
लोक कथाओं के अनुसार उनका नाम रत्नाकर था. एक दिन वे महर्षि नारद से मिले.
नारदजी ने उन्हें आत्मज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाया । नारदजी ने उन्हें “राम-राम” नाम का जाप कराया. और तब से ही उनका जीवन बदल गया.
माना जाता है वाल्मीकि जयंती के दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न-धन और वस्त्र का दान और समाज सेवा करना चाहिए. रिपोर्ट न्यूज पीडिया24
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